भोपाल( नेहा शेख ) बड़ा बाग कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो टनल निकालने की योजना को लेकर जमीन के मालिकाना हक का विवाद सामने आया है| पुराने राजस्व दस्तावेजो की जांच मे
जिस जमीन से मेट्रो लाइन गुजरनी है, वह सरकारी कागजो में दर्ज मिली है| प्रशासन ने 1959 से लेकर 2026-2027 तक के भू-अभिलेखो को आधार बनाकर जमीन को सरकारी बताया है|
प्रस्तावित अंडरग्राउंड लाइन कब्रिस्तान के नीचे से निकाली जानी है| परियोजना का काम शुरू होने पर वक्फ बोर्ड ने कब्रों की सुरक्षा को लेकर आपत्ति जताई थी| इसको लेकर मामला वक्फ ट्रिब्यूनल तक पहुंचा और विवाद के चलते मेट्रो का कार्य करीब छह महीनो तक प्रभावित रहा| अब पुराने रिकॉर्ड सामने आने के बाद जमीन के आधिकार को लेकर स्थिति पर फिर चर्चा शुरू हो गई है|
दो दिन पहले मेट्रो ने बैरिकेडींग कर दोबारा काम शुरू करने की तैयारी थी | इसी दौरान वक्फ बोर्ड की और से फिर आपत्ति दर्ज कराई गई| अधिकारियों का कहना है कि जमीन से संबंधित दस्तावेजों मे सरकारी दर्ज होने की स्थिति स्पष्ट है| इसी आधार पर प्रशासन ने मेट्रो परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराई है| सोमवार देर रात मशीनों और कंटेनर पहुंचे तो विरोध हुआ| विधायक आतीफ़ अकील ने काम रुकवा दिया| तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह- जमीन शुरू से सरकारी है| आदेश जारी कर मेट्रो को जमीन सौंप दी गई है|
3 पुराने दस्तावेजों मे सरकारी दर्ज है जमीन राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 1959 मे खसरा नंबर 208/1 मे जमीन को शासकीय दर्ज किया गया था| रकबा 12.088 हेक्टेयर यानी 29.87 एकड़| इसके बाद 2026-2027 के भू-अभिलेख मे भी यही स्थिति कायम है| मेट्रो की भूमि संबंधी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजो मे भी उक्त जमीन का उल्लेख सरकारी भूमि के रूप मे किया गया है|
इस विवाद से 6 महीने पिछला प्रोजेक्ट
वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड मे बर्ष 1958 का उल्लेख है| इसके अनुसार सरकार ने उस
समय कब्रिस्तान के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी ने उस वक्फ बोर्ड को दी थी| हालांकि जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्थिति अलग बताई गई है| इसी बिंदु को लेकर अब दोनों पक्षो के दावे सामने आ रहे है|
टनल 60 फीट नीचे, कब्रे 3 से 5 फीट गहरी
मेट्रो की प्रस्ताविक टनल जमीन की सतह से करीब 60 फीट नीचे बनाई जानी है| वही कब्रों की सामान्य गहराई लफभग 3 से 5 फीट होती है| मेट्रो की ओर से इसी तकनीकी स्थिति की देखते हुए निर्माण से कब्रों को नुकसान की आशंका की कम बताया जा रहा है| दूसरी ओर बक्फ बोर्ड का कहना है की निर्माण के दोरान कब्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए|
आज फिर प्रोजेंटशन, अब मशीनों की अडचन
मेट्रो की ओर से बुधवार को जनप्रतिनिधियों के सामने योजना का दोबारा प्रोजेंटेशन रखा गया| हालांकि इस पर सभी की सहमति नही बन सकी| जनप्रतिनिधियों ने मांग रखी की टनल मशीन को कब्रिस्तान से आगे ले जाकर निकाला जाए| वही मेट्रो अधिकारीयो का कहना है कि तकनीकी रूप से यह विकल्प आसान नही है|
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