भोपाल ( सैफुद्दीन सैफी) एक और प्रधानमंत्री सार्वजनिक परिवहन अपनाने का आवाहन कर रहे है, लेकिन राजधानी भोपाल में आधिकारियों की लापरवाही से सार्वजनिक परिवहन की दुर्दशा हो चुकी है। सूत्र बताते है कि यदि सार्वजनिक पारिवहन कि स्थिति दुरुस्त होती तो रोजाना 67 लाख रुपए के ईधन कि बचत हो सकती थी। भोपाल शहर कि अनुमानित जनसंख्या 27 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है, ऐसे शहर मे सार्वजनिक परिवहन सुविधा के नाम पर कभी 300 लो फ्लोर बसो का संचालन शुरू हुआ था,जिनमे रोजाना डेढ लाख यात्री सफर करते थे।अब सिर्फ 60 बसो का संचालन हो रहा है इनमे 16 से 20 हजार यात्री सफर कर पाते है। मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रोधोगिक संस्थान ( मैनिट) में ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग विभाग के डॉक्टर राहुल तिवारी का कहना है कि एक लो फ्लोर बस 50 यात्रियो को लेकर एक लीटर डीजल मे चार किलोमीटर चलती है, अगर बस एक फेरे मे 20 किलोमीटर का सफर तय करती है, तो कुल पाँच लीटर डीजल खर्च होता है यानि हर व्यक्ति पर ईधन खर्च डेढ़ रुपए से भी कम आता है। और अगर ये ही पचास यात्री निजी वाहनो से 20 किलोमीटर का सफर करे तो हर वाहन चालक का कम से कम आधा लीटर ईधन खर्च होगा। इस हिसाब से 50 लोग 25 लीटर ईधन खर्च करेंगे अब अगर 1 लाखा 24 हजार बेबस यात्री निजी साधनो से सफर करे तो ईधन का खर्च 67 हज़ार लीटर पुहंच जाएगा अगर 100 रुपए लीटर का औसत मूल्य माने तो रोजाना 67 लाख रुपए का खर्च आएगा
वैसे भोपाल मेट्रो का संचालन दिसंबर 2025 मे शुरू हो चुका है, लेकिन ये सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर रह गई है उधर सार्वजनिक परिवहन सुधारने के दावे के साथ पीएम ई बस सेवा के तहत सौ ई बसे चलाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन शहर मे अभी तक इन बसो को खड़ा करने के लिए डिपो तक तैयार नही हो पाया है ऐसे हालात मे तो ये ही कहा जा सकता है
“लिखी परेशानी किस्मत मे तो,किसी को दोष क्या देना
जहां वक्ते हाकिम हो बेदर्द, तो वहाँ फरियाद क्या करना
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