भोपाल ( कशिश मालवीय )
एक साल का लंबा समय और फाइलों का ढेर , लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही के आरोपी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को बचाने की चाल चल रही है या फाइलों की जांच में सुस्ती चल रही है हैरान की बात यह है कि कार्रवाई के नाम पर एक साल पहले थमाए गए नोटिस आज भी सिर्फ फाइलों में ही अटके हैं | मध्यप्रदेश में बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले के मामले में दोषी 60 से अधिक नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 के बीच नोटिस जारी किए गए थे अब मार्च 2026 आ गया है पूरे एक साल बाद भी किसी भी आरोपी के खिलाफ विभागीय जांच चालू नहीं की गई है चौंकाने की बात तो यह है कि करीब 22 राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रथम श्रेणी अधिकारियों को भी नोटिस जारी हुए लेकिन जब बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की बात आई पूरी कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया बीते एक साल में न तो कोई सस्पेंड हुआ न ही कोई अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई |
नर्सिंग कॉलेजों को मनमाने तरीके से मान्यता देने का मामला गर्माने के बाद इसकी जांच सीबीआई ने की इसके बाद कई कॉलेज अपात्र पाए गए इस दौरान नर्सिंग के हजारों स्टूडेंट्स का भविष्य चौपट हो गया सीबीआई ने जांच करके इसकी रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की थी इसके बाद तय हुआ कि दोषियों को आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच की जाए लेकिन हालात जस की तस बने हुए हैं 2024 में ही तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने लगभग 110 नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे बाद में यह संख्या घट गई थी |
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा – जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है 70 डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ को नोटिस जारी किया गया लेकिन आरोप पत्र 15 के खिलाफ ही दिया गया इसका मतलब है कि बाकी सभी को बचा लिया गया |
मप्र नर्सिंग काउंसिल रजिस्ट्रार मुकेश सिंह ने कहा – जिन लोगों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं उन पर कार्रवाई वरिष्ठ कार्यालय स्तर से की जानी है।
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