भोपाल। हर काम के लिए केंद्रीय नेतृत्व का गुणगान करने वाले मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद की ब्रांडिंग करने के लिए झांकी जमाने में इतने मगन हैं कि उनको ध्यान केंद्र सरकार और मोदी की महत्वाकांक्षी ‘नल जल योजना’ पर नहीं है। प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है, ऐसे में जल संकट और गहराने लगा है। राजधानी के आसपास के गांवों में ‘नल जल’ योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, इस कारण बड़ी आबादी पीने के पानी के लिए हैंडपंपों पर निर्भर है।
भोपाल जिला पंचायत के 475 गांवों में पेयजल संकट खड़ा हो गया है, लेकिन पीएचई और जल निगम के सक्षम जिम्मेदार अधिकारियों ने गांवों में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई है। इन गांवों में 121 नल-जल योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, और जहां योजना संचालित हो रही है, वहां 17 हजार से अधिक परिवारों को कनेक्शन ही नहीं दिए गए हैं। इसके अलावा जिले में तीन हजार से अधिक हैंडपंपों का जल स्तर कम होने लगा है। जिन तीन सौ से अधिक गांवों में पानी की किल्लत हो रही है, वहां अधिकतर हैंडपंपों में 20 फीट तक पाइप बढ़ाए गए हैं। जबकि 264 हैंडपंप पूरी तरह से बंद हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार 475 गांवों में 98 हजार 128 परिवार रहते हैं जिन में पेयजल आपूर्ति करने की जिम्मेदारी पीएचई और जल निगम को दी गई है। नल जल योजना में से 86 योजनाएं बंद पड़ी हैं, और 121 नलजल योजनाएं अब तक अधूरी पड़ी हैं। इसके विपरीत मोहन सरकार विज्ञापनों में झांकियां कर नलजल योजना को सफल बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है।
Lok Jung News Online News Portal