भोपाल : 25/12/2024 : नगर निगम का निगरानी सिस्टम कमजोर करने वाले अफसर सभी वाहनों को डीजल भरपूर दिलवाते हैं, लेकिन इन वाहनों से काम काराया जा रहा है या नहीं यह देखने वाला कोई नहीं है | खड़े वाहनों को भी डीजल चाहिए ताकि ड्राइवर उसे बेचकर मुनाफा कमा सके | और ड्राइवरों से हफ्ता वसूली करने वाले निगम के अफसर भी निगम का खजाना खाली कर अपनी जेबें भरने में लगे हैं | विभिन्न शाखाओं के वाहन प्रभारी बेखौफ मनमानी कर रहे हैं, सीधे कहें तो ड्राइवरों से हफ्ता वसूली और डीजल चोरी आसानी से होती रहे इसके लिए अफसरों ने निगरानी सिस्टम ही इतना कमजोर कर रखा है कि कोई चाहकर भी गड़बड़ी नहीं पकड़ पाता | नगर-निगम के पंप से रोजाना 1600 वाहनों को 20 हज़ार लीटर से अधिक डीजल दिया जाता है, लेकिन निगरानी के अभाव में खानापूर्ति हो रही है | निगम के बेड़े में शामिल 950 वाहन ऐसे हैं, जिनमें जीपीएस सिस्टम ही नहीं लगा है दिखावे के लिए सिर्फ 650 वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगवा दिया गया है | वाहनो को मिलने वाला डीजल 21 ज़ोन के एएचओ सहित 10 विभिन्न शाखाओं के प्रभारियों द्वारा जारी इंडेंट बनाकर पंप पर भेज देते हैं, पंप इंचार्ज भी वाहन प्रभारियों के हस्ताक्षर से जारी इंडेंट के आधार पर डीजल दे देते हैं | कई बार तो इनके द्वारा अतिरिक्त डीजल की मांग की जाती है, जिस पर एक वाहन के लिए 20 लीटर तक अतिरिक्त डीजल आसानी से दे दिया जाता है | इधर डीजल टैंक प्रभारी भी वाहनों के संचालन और उनके एवरेज की जांच किए बिना ही मनमाना डीजल जारी कर देते हैं | हालांकि अफसरों का तर्क है कि वाहनों के पुराने इंडेंट के आधार पर एवरेज देखकर ही डीजल दिया जाता है इसके बाद भी डीजल की लगातार चोरी कैसे हो जाती है ? इसका जवाब किसी अफसर के पास नहीं है |
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