नई दिल्ली / सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और वॉट्सएप की सुनवाई करते हुए नई प्राइवेसी पॉलिसी पर चल रही मनमानी को सख्त रुख अपनाकर हिला कर रख दिया कोर्ट ने कहा दिग्गज आईटी कंपनियां डेटा साझा करने के नाम पर भारतीय नागरिकों की निजता से खिलवाड़ नहीं कर सकतीं सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि अगर आप भारतीय कानून और नागरिकों की प्राइवेसी का सम्मान नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दीजिए हम अपने नागरिकों की प्राइवेसी से समझौता नहीं होने देंगे कोर्ट ने साफ किया कि वह भारतीय नागरिकों की एक भी निजी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देगा |
मामला वॉट्सएप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने नवंबर 2024 में मेटा पर 213.14 करोड़ रूपर का जुर्माना लगाया और विज्ञापन के लिए डेटा साझा करने पर पांच साल की रोक लगाई नवंबर 2025 में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ने जुर्माना जारी रखा पर डेटा – शेयरिंग से आंशिक रोक हटा दी कंपनियों ने जुर्माने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी वहीं सीसीआई ने डेटा साझा करने की अनुमति को चुनौती दी है |
सुनवाई सीजेआई जस्टिस जॉयमाल्य बागची व जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने की केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता सीसीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता समर बंसल पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी अरुण कथपालिया और अखिल सिब्बल मेटा और वॉट्सएप की ओर से पेश हुए |
पीठ ने कहा कि वॉट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी से बाहर निकलने का यूजर्स को कोई स्पष्ट और व्यावहारिक विकल्प नहीं दिया गया पीठ ने इसे निजी व्यावसायिक हित जानती हैं और यह भी जानती हैं कि यूजर्स को एप का आदी कैसे बनाया गया है यूजर्स के पास विकल्प नहीं छोड़ा गया और एक तरह की एकाधिकार जैसी स्थिति बनी हुई है कोर्ट ने कहा यह संविधान का मजाक है |
सुप्रीम कोर्ट : देश में निजता के अधिकार की सख्ती से रक्षा की जाती है प्राइवेसी पॉलिसी इतनी चालाकी से बनाई गई है कि आम व्यक्ति उसे समझ नहीं सकता वॉट्सएप हलफनामा देकर बताए कि उसकी पॉलिसी कैसे काम करती है और डेटा कैसे साझा होता तमिलनाडु के किसी गांव में रहने वाला जो केवल अपनी भाषा समझता है इन शर्तों को कैसे समझेगा ?
वॉट्सएप मेटा : सीमित डेटा साझा किया जाता है भारत में डेटा प्रोटेक्शन कानून मौजूद है |
जस्टिस बागची : डेटा संबंधित यह कानून अभी लागू नहीं है |
सीजेआई : वॉट्सएप का घोषित उद्देश्य केवल मैसेजिंग सेवा देना है न कि यूजर्स का डेटा जुटाकर उसको बेचना |
रोहतगी: मैसेजिंग सेवा फ्री है |
सीसीआई : वॉट्सएप की पूरी कमाई विज्ञापन से होती है यूजर्स ही उसका प्रोडक्ट हैं एप मुफ्त इसलिए है क्योंकि डेटा के जरिए विज्ञापन से आय होती है |
सीजेआई: वैध तरीके से कमाई में गलत कुछ नहीं यहां सवाल यूजर्स के अधिकार और उनके डेटा पर सहमति का है |
रोहतगी : एप एन्क्रिप्टेड है दो लोगों की बातचीत कंपनी नहीं पढ़ सकती हमें हलफनामा देने की अनुमति दी जाए |
सुप्रीम कोर्ट : केंद्र को पक्षकार बनाया जाता है यदि कंपनी हलफनामा नहीं देती तो उसकी अपील खारिज कर सकते हैं 9 फरवरी को अंतिम आदेश देंगे |
वॉट्सएप ने 2021 में प्राइवेसी के नियम बदले और यूजर्स के लिए मेटा से डेटा साझा करना अनिवार्य कर दिया शर्तें मानना मजबूरी बना बाहर निकालने का साफ विकल्प नहीं है |
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