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ब्लैकलिस्टेड ‘एजाइल सिक्युरिटी’ को सौंप दी हमीदिया अस्पताल और पुरातत्व संग्रहालय की सुरक्षा। हजारों मरीजों की जान और करोड़ों की धरोहर खतरे में। जवाब कौन देगा?


ब्लैकलिस्टेड ‘एजाइल सिक्युरिटी’ को सौंप दी हमीदिया अस्पताल और पुरातत्व संग्रहालय की सुरक्षा। 

हजारों मरीजों की जान और करोड़ों की धरोहर खतरे में। 

जवाब कौन देगा?

ठेका किसके इशारे पर दिया गया?

 

भोपाल( सैफुद्दीन सैफी) राजधानी भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ब्लैकलिस्टेड कंपनी ‘एजाइल सिक्युरिटी’ को शहर के दो सबसे संवेदनशील संस्थानों – हमीदिया अस्पताल और पुरातत्व संग्रहालय – का सुरक्षा ठेका दे दिया गया है।

 

हमीदिया अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है जहाँ रोज हजारों मरीज आते हैं। वहीं पुरातत्व संग्रहालय में करोड़ों की ऐतिहासिक धरोहरें रखी हैं। ऐसे में काली सूची में डाली गई कंपनी को इन दोनों जगहों की सुरक्षा सौंपना सीधे-सीधे जनता और धरोहरों की सुरक्षा से खिलवाड़ है।

 

नियमानुसार ब्लैकलिस्टेड फर्म किसी भी सरकारी ठेके के लिए पात्र नहीं होती। फिर भी एजाइल सिक्युरिटी को यह ठेका कैसे मिला, यह सबसे बड़ा सवाल है। सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि इसमें बड़े स्तर पर अनियमितता और मिलीभगत हुई है।

 

इस मामले पर अभी तक स्वास्थ्य विभाग या संस्कृति विभाग की तरफ से कोई सफाई नहीं आई है। वही दूसरी और इस सुरक्षा एजेंसी मे कार्यरत सुरक्षा कर्मियों से बात हुई तो ये जानकारी भी निकल कर आ रही है कि हमीदिया अस्पताल में तपती गर्मी मे सुरक्षा का दायित्व निभा रहे गार्डो को पिछले 5 महीने से वेतन 20 से 25 दिन देरी से मिल रहा है गौर तलब है कि एक गार्ड जिसको कही 9 हजार तो कही 11 हजार के वेतन पर 8 या 12 घंटे की नोकरी पर रखा ज्ञ है उसे अगर वेतन 20 से 25 दिन देरी से मिलता है तो वो अपने परिवार की दैनिक जरूरतों को कैसे पूरा कर पाएगा?

एक जानकारी लोकजंग को ये भी मिली है कि कई सुरक्षा गार्ड से 12 घंटे कि सेवा ली जा रही है और कलेक्टर रेट से कम वेतन पर कार्य करवाया जा रहा है इतनी सारी गड़बड़ घोटालो के आरोपो से घिरी एजेंसी को महत्वपूर्ण सरकारी भवन और परिसरों कि सुरक्षा का जिम्मा बिना जांच पड़ताल के देना गंभीर सवाल खड़े करता है बल्कि ठेका आवंटन मे भारी टेबल के नीचे हुए अवेध लेनदेन कि तरफ भी इशारा करता है। भोपाल कि जनता पूछती है मोहन यादव सरकार से कि भारत के प्रधानमंत्री ने न “खाऊँगा न खाने दूंगा” का बयान देकर देश कि जनता को आश्वस्त किया था की भ्रष्टाचार बिलकुल बर्दाश्त नही किया जाएगा क्या मध्यप्रदेश की मोहन सरकार देश के प्रधानमंत्री के बयान पर खरी साबित हो रही है?

 

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