भोपाल ( सैफुद्दीन सैफी) जिसका अंदेशा था आखिर वही हुआ | महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक दो तिहाई बहुमत के अभाव में लोकसभा से पारित नहीं हो सका | इसी के साथ एक तरह महिला आरक्षण फिर ठंडे बस्ते में चला गया | कहना कठिन है कि अब वह कब ठंडे बस्ते से बाहर आएगा | यदि पक्ष – विपक्ष के बीच निकट भविष्य में सहमति नहीं बनती तो आसार यह है कि महिला आरक्षण 2034 के लोकसभा चुनाव के पहले लागू नहीं हो सकता | महिला आरक्षण के सपने को साकार करने में पहले ही बहुत देर हो चुकी है | महिला आरक्षण का विचार करीब तीन दशक पहले राजनीतिक विमर्श का विषय बना था इसके बाद सभी दल महिला आरक्षण के पक्ष में बातें तो करते रहे , लेकिन वे उसके लिए मन से तैयार नहीं हुए | इसी कारण महिला आरक्षण संबंधी विधेयक कई बार संसद में पेश होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ सका | अंतत: 2023 में वह सभी दलों की सहमति से पारित तो हुआ पर इस शर्त के साथ कि उसे 2029 के आम चुनाव में लागू किया जाएगा | इसका कारण 2021 में होने वाली जनगणना में विलंब होता रहा | चूंकि नई जनगणना अब शुरू हुई है और उसके नतीजे आने में समय लगेगा , इसलिए मोदी सरकार ने अगले आम चुनावों से ही महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने और विपक्ष की आपत्तियों को दूर करने के लिए यह फार्मूला रखा कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटो की संख्या में 50 प्रतिशत का इजाफा करके महिला आरक्षण को लागू किया जाए | लेकिन पता नहीं क्यों विपक्ष को यह फार्मूला रास नहीं आया , जबकि इससे किसी भी राज्य और विशेष रूप से दक्षिण के राज्यों के राजनीतिक हितो की कोई क्षति नहीं होने जा रही थी | महिला आरक्षण संबंधी विधेयक पारित न होने से विपक्ष अपनी जीत की घोषणा अवश्य करेगा , लेकिन ऐसा करके वह देश की महिलाओं को मायूस करेगा | निश्चित रूप से सत्ता पक्ष को भारी झटका लगा है , लेकिन उसे यह प्रचारित करने का मौका भी हाथ लग गया है कि विपक्ष ने महिला आरक्षण लागू नहीं होने दिया और इस तरह आधी आबादी की आशाओं पर तुषारा पात किया है जिसे यह माना जा रहा है कि मोदी और शाह जानते थे कि हर परिस्थिति में पलडा उनका ही भारी रहने वाला है , गिर गया तब भी और पारित हो जाता तब भी |
मध्यप्रदेश के अति उत्साही लाल मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने मोदी प्रेम में इतने डूब गए कि नारी शक्ति वंदन बिल के लोकसभा में पेश होने के दो दिन पहले ही उन्होंने राजधानी के हर अधिकांश हिस्सों को नारी शक्ति वंदन , संसद में गूंजेगी हमारी आवाज तथा नारी में है दम वंदेमातरम जैसी टैग लाइनों वाले बड़े – बड़े बैनरों से पाट दिया चाहे सुलभ शौचालयों कि दीवारों हो अथवा पोल हो हर जगह नारी शक्ति की महिमा का बखान था इन बैनरों पर करोड़ों रुपए खर्च हुए , लेकिन नारी शक्ति को महिमा मंडित करने वाला विधेयक लोकसभा में गिर गया | ऐसे में मोहन यादव का अति उत्साह धारा रह गया
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