भोपाल / (सैफ़ुद्दीन सैफ़ी) कोलार के बांसखेड़ी क्षेत्र में 1650 एमएम की ग्रेविटी पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, नगर निगम के दावों और सिस्टम की पोल खुलकर सामने आ गई। निगम प्रशासन ने दो दिन में काम सुधारने का दम भरा था, लेकिन इस काम में पूरे चार दिन लग गए, नतीजा यह हुआ कि शहर की करीब दस लाख की आबादी पांच दिनों तक बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गई। जनता परेशान होती रही और निगम का आपदा प्रबंधन पूरी तरह सुस्त नजर आया। चार दिन की भारी मशक्कत के बाद जिन घरों में पानी पहुंचा उसका रंग लाल या मटमैला था। शहर के श्यामला हिल्स, शिवाजी नगर, तुलसी नगर, अरेरा कॉलोनी, ई-एक, पांच और छह, नादियाल खेड़ा, टीलाजमालपुरा और जवाहर चौक जैसे इलाकों में लोगों को गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ा। बताया कि निगम शहर में रोज 460 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई करता है, लेकिन पिछले कुछ समय से एनएचएआई और मेट्रो की निर्माण कार्यों के चलते आए दिन पाइप लाइनें टूट रही हैं। पानी के संकट को देखते हुए 71 टैंकरों से 24 घंटे 700 ट्रिप में विभिन्न इलाकों में पानी की सप्लाई की गई। जैसा कि अनुमान है, निजी टैंकर संचालकों ने मौके का फायदा उठाकर दाम बढ़ा दिए। आम तौर पर जो टैंकर 600 रुपये में मिलता था, उसके लिए 2000 रुपये तक वसूले गए। फिलहाल पानी 62 टंकियों भरने में समय लग रहा है। निर्माण एजेंसियों में आपसी तालमेल और विभिन्न विभागों में समन्वय न होने के कारण बिना अनुमति जहां-तहां खुदाई शुरू कर दी जाती है और लापरवाही के चलते पाइप लाइनें फूट जाती हैं। दरअसल पाइप लाइन नहीं बल्कि निगम सिस्टम फूटता है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ता है।
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