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पेड़ कटाई और पौधरोपण के मामले में नगर निगम और डीएफओ सवालों के घेरे में……


भोपाल ( कशिश मालवीय ) जिस शहर की पहचान कभी उसकी हरियाली से होती थी आज वह विकास की दौड़ में अपनी सांसें खो रहा है बीते 5 साल में राजधानी भोपाल की सड़कों को चौड़ा करने और बुनियादी ढांचे को संवारने के नाम पर हजारों फलदार और छायादार पेड़ बलिदान किए लेकिन उनके बदले लगाए गए नन्हें पौधों की हकीकत सवालिया निशान बन रही है मामला कोलार सिक्स लेन निर्माण के लिए 4105 पेड़ों की कटाई के बाद शहर में कटाई की अनुमति , क्षतिपूर्ति राशि , पौधरोपण और उनके जीवित रहने पर सवाल खड़े हो गए हैं | इस मामले में एनजीटी ने कड़ा एक्शन लेते हुए मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण ने कहा कि पेड़ तो काटे जा रहे हैं , लेकिन उनके बदले लगाए गए पौधे जीवित नहीं  रहे यह गंभीर स्थिति है |

एनजीटी ने नगर निगम कमिश्नर और डीएफओ से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है उन्हें हलफनामे पर पूरी जानकारी देनी होगी अधिकरण ने 1 जनवरी 2026 की स्थिति में पिछले पांच साल का पूरा रिकॉर्ड भी तलब किया है |

नितिन सक्सेना की याचिका पर कोलार निर्माण में पेड़ कटाई का मामला एनजीटी पहुंचा था जांच में सामने आया कि 4105 पेड़ काटे गए अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता के मुताबिक पीडब्ल्यूडी  ने सड़क निर्माण के लिए सामाजिक वानिकी से अनुमति लेने की बात कही थी लेकिन न तो जमा राशि और उसके खर्च का हिसाब दिया गया और न ही निगम कमिश्नर की अनुमति का दस्तावेज़ पेश हुआ इसी आधार पर एनजीटी ने पूरे शहर में पिछले 5 साल में हुए पेड़ कटान और क्षतिपूर्ति पौधरोपण का ब्योरा मांगा है यह भी पूछा है कि किस प्रजाति के कितने पौधे लगाए गए उनमें से कितने जीवित हैं और उनकी देखरेख किस एजेंसी ने की |

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