भोपाल ( नेहा शेख )प्रेमपुरा घाट पर गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद तालाब के पानी में मछलियों की मौत ने जल प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी है। गणेश विसर्जन के बाद पानी की जांच रिपोर्ट एक हफ्ते के भीतर आनी थी, लेकिन पूरा एक महिना बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। इसके चलते मछलियों की मौत का असली कारण रसायनिक प्रदूषण, पानी मे ऑक्सीज़न की कमी या कोई अन्य वजह-स्पष्ट नहीं हो सका है।
सफाई में अनदेखी और प्रतिमाओं के रंगो का घटक असार: प्रेमपुरा घाट पर ठोस कचरा अधिक मात्रा में नहीं है, लेकिन विसर्जित प्रतिमाओ को वक्त रहते पानी से बाहर नहीं निकाला गया। लंबे समय से सफाई न होने की बात भी सामने आई है। विशेषज्ञो के अनुसार, बड़ी प्रतिमाओं के लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से उनमें इस्तेमाल रंग और रसायनिक पदार्थ पानी में घुलने लगते है। कुछ रंगो में भारी धातुएं भी होती हैं, जो जलीय जीवों के लिए बेहद हानिकारक हैं।
पीसीबी अधिकारी ने साधी चुप्पी, रिपोर्ट में देरी
आमतौर पर गणेश विसर्जन के 7 दिनों के भीतर पानी की जांच रिपोर्ट सामने आ जाती है। इस बार 25 सितंबर को गणपति विसर्जन हुआ था, लेकिन 25 अक्टूबर को एक महिना पूरा होने पर भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। रिपोर्ट में देरी का कारण और जांच के नतीजों को लेकर जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिजनल ऑफिसर मनोज कुमार मंदराई से संपर्क किया गया, तो उन्होने कोई जवाब नहीं दिया और चुप्पी साध् ली
ऑक्सीज़न और भारी धातुओं की जांच से साफ होगी वजह
विसर्जन कार्य के लिए आर्टिफिशयल लाइनर बाले अलग कुंड का इस्तेमाल किया जाना चाहिये। प्रतिमाओ को निर्धारित समय में बाहर निकालकर लकड़ी और अन्य सामग्रीका अलग से निपटान करना आवश्यक है केवल घाट की सफाई काफी नहीं हैं, बल्कि पानी में घुले प्रदूषकों की भी नियमित निगरानी होने चाहिये। उन्होने दावा किया है कि पानी में 32 से ज्यादा तरह के भारी रसायन पुष्टि जांच रिपोर्ट से ही होगी। पानी में घुलित ऑक्सीज़न, पीएच लेवल, अमोनिया और सभावित भारी धातुओं कि जांच से ही मछलियों की मौत की वास्तविक वजह साफ हो पाएगी।
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