भोपाल ( नेहा शेख )स्वास्थ्य सेक्टर में मरीजो के साथ हो रही बड़ी लूट का खुलासा हुआ है। यहाँ सिर्फ कैंसर की जीवनरक्षक दवाइया ही नहीं, बल्कि सिरिंज, बीटी सेट जैसे बेहद आम और छोटे मेडिकल समान भी मरीजों को अत्यधिक बड़े हुए दामो पर बेचे जा रहे है। स्थिति यह है कि जो सामन डिस्ट्रीब्यूटर से बेहद कम कीमत पर खरीदा जाता है। उसे अस्पताल मरीजो को 520% से लेकर 1325% तक के भारी मुनाफे पर थमा रहे है। अस्पतालो और ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेंटरो मे रोज़मर्रा के इस्तेमाल वाले चिकित्सा उपकरणो के दामो में भारी अंतर देखा गया है।
बीटी सेट: जिसकी वास्तविक कंपनी रेट 9 रूपये और डिस्ट्रीब्यूटर रेट 15.50 रूपये है, वह मरीजो को एमआरपी 226 रूपये और कुछ अस्पतालो मे 221 रूपये रूपये से लेकर 380% तक के मुनाफे पर बेचा जाता है।
यूरोलियन कैथेटर: जो मूत्र रोगियो के कम आता है और उसकी मात्र 9.30 रूपये (डिस्ट्रीब्यूटर रेट 12.50 रूपये) है, लेकिन मरीजो से इसके 64 से 102 रूपये वसूले जाते है।
डिसपोजेबल सिरिंज; दवा चढाने के काम आने वाली इस सिरिंज की कीमत डिस्ट्रीब्यूटर के यहाँ 18 रूपये है, जबकि अस्पतालो में यह 20 से 22 रूपये में दी जाती है।
इंट्राकैथ 20 गेज; इस मेडिकल यूटिलिटी की डिस्ट्रीब्यूट कीमत 4.50 रूपये है। जबकि अस्पतालो में यह 20 से 22 रूपये मे दी जाती है।
नेबुलाइजर मास्क; ऑक्सीजन देने के काम आने वाली इस मास्क की डिस्ट्रीब्यूटर रेट 45 रूपये है। लेकिन मरीजो से इसके लिए 310 रूपये कुछ अस्पतालो में इसमे भी ज्यादा वसूले जा रहे है, जिस पर 520% तक का मुनाफा कमाया जा रहा है।
ड्रग कंट्रोलर का बयान:
इस पूरे खेल पर ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक का कहना है की केंद्र सरकार को लेकर एनपीपीए रेट कंट्रोलिंग को लेकर काम कर रही है। कैंसर की दवाइयो पर कैपिंग शुरू हो चुकी है और उम्मीद है कि जल्द ही अन्य जरूरी मेडिकल उपकरणो और सामानो पर भी ऐसा नियम लागू होगा। जिसके बाद ओवर-बिलिंग पर रोक लगेगी। सवाल यह है कि इन लापरवाही और मुनाफाखोर ज़िम्मेदार लोगो पर नकेल कब कसी जाएगी?
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