भोपाल ( सैफुद्दीन सैफी ) मेट्रो रेल कार्पोरेशन की मननानी के पुराने भोपाल मे नया विवाद खड़ा कर दिया है। राज्य वक्फ आधिकरण के सामने एक याचिका में दावा किया गया है कि मेट्रो कि ऑरेंज लाइन पर पुल बोगदा से सिंधी कालोनी तक निर्माणाधीन भूमि गत सुरंग शहर के कुछ पुराने कब्रिस्थानों के नीचे से गुज़रेगी।
आशंका जताई जा रही है कि इस परियोजना से हजारों कब्रों को नुकसान हो सकता है,वहीं मेट्रो कार्पोरेशन यह कहकर पल्ला झाड लिया है कि परियोजना क्षेत्र में कोई हेरिटेज इमारत नहीं है।इस मामले में कमेटी इंतेजामिया औकाफ़े आम्मा कि और से दायर इस याचिका में कहा गया है कि भूमिगत सुरंग कि जद में भोपाल टाकीमासुमा ज़ के पास बड़ा बाग क्षेत्र में ताकिया अम्मन शाह मस्जिद नूरानी और वक्फ का कब्रिस्थान आ रहा है। प्रस्तावित सुरंग से इन कब्रों को नुकसान हो सकता है।वही कब्रिस्थान की नोययत भी बदल सकती है।इस विवाद नें एक तथ्य ये भी है, कि मेट्रो कार्पोरेशन अथवा जिला प्रशासन मे से किसी ने भी क्षेत्र के लोगों से इस योजना पर किसी तरह का कोई संवाद ही नही किया ।
मेट्रो कार्पोरेशन ने खुद इस सुरंग के ऊपर स्थित इमारतों और संरचनाओ का तकनीकी अध्यन भी नही कराया है। पिछले दिनों खुदाई शुरू होने के बाद मेट्रो को शालीमार ट्रेड सेंटर और रेडसी प्लाजा के बारे मे पता चला।आशंकाओ के बाद एनआईटी के विशेषज्ञो से उसमे से एक की मजबूती की जांच कराई गई। शालीमार ट्रेड सेंटर की जांच अब भी अधूरी है। मेटो कार्पोरेशन हेरिटेज की आड़ मे मनमानी कर रहा है। उसका कहना है कि,भोपाल टाकीज़ स्थित बड़ा बाग कब्रिस्थान और नारियल खेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा का हेरिटेज के रूप मे कोई उल्लेख नही है क्षेत्रीय विधायक भी इस परियोजना का लंबे समय से विरोध कर रहे है उनका कहना है कि जब शुरुआत से ही यह स्पष्ट है कि संबधित क्षेत्र मे कब्रिस्थान मौजूद है तो वहाँ मेट्रो की प्लानिंग ही नहीं की जानी चाहिए थी
अब देखना ये होगा की समय रहते मेट्रो कार्पोरेशन इस विवाद का कोई उचित समाधान निकाल पता है या नहीं।
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