भोपाल(सैफ़ुद्दीन सैफ़ी)
छोटे तालाब और भोजलेंड के फुल टैंक लेबल(एफ टी एल) और बफर जोन में कथित तौर पर अवैध निर्माण किए जा रहे है।तथा पेड़ो में ड्रिल मशीन से छेद कर उनमें रसायनिक पदार्थ डालकर उन्हें सुखाने का षडयंत्र रचा जा रहा है। इसको लेकर एनजीटी ने सुनवाई करते हुए इसकी जांच के लिए संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिये है।
एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल बैच में दायर याचिका में बताया गया है कि प्रोफेसर कालोनी क्षेत्र में छोटे तालाब के किनारे पर्यावरणीय नियमो की अनदेखी कर निर्माण कार्य किए जा रहे है,साथ ही पेड़ो में ड्रिल मशीन से छेद कर रसायनिक पदार्थ डाला गया है। जिससे वो धीरे धीरे सुख जाए और जमीन को निर्माण के लिये खाली कराया जा सकें।
दायर याचिका में इसे वृक्षो संरक्षण अधिनियम 1973 और वेटलैंड संरक्षण नियमों का उल्लंघन बताया गया है। दरअसल भोजलेंड एक ऐसी साइड है, जहाँ एफटीएल से 50 मीटर की सीमा के भीतर किसी भी स्थायी निर्माण की अनुमति नही है। इसके बावजूद निर्माण गतिविधि जारी है।
एनजीटी ने कहा है कि नगर निगम सार्वजानिक ट्रस्ट के सिद्धांत के तहत पर्यावरण और जलाशयों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार संस्था है, मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकरण ने संयुक्त समिति गठन की है। जिसमे पर्यावरण, वन,एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय,केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वेटलेंड अथॉरिटी के प्रतिनिधियों को शामिल किया है। समिति चार सप्ताह में संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करेगी,वहीं नगरनिगम भोपाल को दो सप्ताह में कार्यवाही प्रतिवेदन पेश करना होगा। मामले की अगली सुनवायी 15 जुलाई को होगी।
इसी तरह पश्चिमी बायपास के निर्माण में रोक लगाने या अलाइनमेंट में बदलाव के लिये ट्रिब्यूनल ने इनकार कर दिया है।अधिकरण ने कहा है कि सड़क का अलाइनमेंट तय करना विशेषज्ञ एजेंसियों व सरकार का नीतिगत मामला है।
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