भोपाल ( कशिश मालवीय ) शहर में कुत्तों का आतंक इस कदर फैला हुआ है कि बड़े न बच्चे कोई सुरक्षित नहीं है जनता का घर से निकलने तक मुश्किल हो गया है शनिवार को राजधानी के बागसेवानिया इलाके में एक 6 साल का मासूम बच्चा कुत्तों के हमले का शिकार हुआ लेकिन यह सिर्फ अकेला मामला नहीं है भोपाल में हर महीने 1500 से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं और इस साल अब तक आंकड़ा करीब 20 हजार तक पहुंच चुका है इसके बावजूद नगर निगम के पास स्ट्रीट डॉग को पकड़ने और नियंत्रित करने की ठोस व्यवस्था नहीं है डॉग लवर कुत्तों के गले में पट्टा बांध देते हैं जिससे टीम उन्हें पालतू मान लेती है और रोज 10 से ज्यादा विवाद होते हैं पालतू डॉग के एक हजार से कम लाइसेंस बने हैं |
भोपाल को डॉग और रेबीज फ्री सिटी बनाने की योजना अब तक कागजों में ही सीमित है बाहर नहीं आ सकी है नगर निगम यह दावा जरूर करता कि देश के 100 शहरों में से सिर्फ भोपाल ने ही केंद्र सरकार को रेबीज फ्री सिटी का प्लान सौंपा है लेकिन सच्चाई तो यह है कि इस दिशा में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई |
नगर निगम स्ट्रीट डॉग हमलों को रोकने हर सोसायटी में फीडिंग पॉइंट बनाने की योजना बनाई थी खाने कि जगह और समय तय करने और रिकॉर्ड रखने की ज़िम्मेदारी सोसायटी को दी गई लेकिन तीन महीने बीतने के बावजूद यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हुई |
फीडिंग पॉइंट का उद्देश्य डॉग को जनता से दूर रखना था भोजन की तलाश में घूमते कुत्ते खाना न मिलने पर हिंसक हो जाते हैं निगम के अनुसार शहर में करीब 1.20 लाख स्ट्रीट डॉग है पिछले साल डॉग बाइट के करीब 24 हजार मामले सामने आए थे |
एनीमल बर्थ कंट्रोल रूल 2023 के अनुसार कॉलोनियों में रहवासियों की सहमति से फीडिंग पॉइंट तय करने होंगे एएचओ को रहवासियों और पेट लवर के साथ बैठकर करनी होगी ये पॉइंट बच्चों की आवाजाही से दूर हों |
नगर निगम डॉ. बीपी गौर ने कहा – शहर में 5 टीमें डॉग पकड़ने की कार्रवाई कर रही हैं सबसे बड़ी समस्या कुत्तों के गले पट्टा बंधा होना है जिससे विवाद की स्थिति बनती है |
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