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टेंडर प्रक्रिया सवालों के घेरे में बिना सुनवाई के टेंडर खुलते ही चंद मिनटों में दो को थमाया वर्क ऑर्डर….


भोपाल ( कशिश मालवीय ) पारदर्शिता के दावों के बीच लोक निर्माण विभाग में टेंडर आवंटन का अजीबगरीब मामला सामने आया है यहां नियमों को ताक पर रखते हुए ऐसी तेजी दिखाई है जो चर्चा का विषय बनी हुई है टेंडर कमेटी ने बिड खुलते ही महज कुछ मिनटों के भीतर बिना किसी सुनवाई के दो बिडर्स को अयोग्य घोषित कर दिया और अगले ही दिन वर्क ऑर्डर थमा दिया गया |

हाल में लोक निर्माण विभाग के एक ई – टेंडर में टेक्निकल से लेकर फाइनेंशियल बिड खोलने का आदेश देने की पूरी प्रक्रिया 7 मिनट में पूरी कर दी गई नियमानुसार डिस्क्वालिफाई किए गए ठेकेदारों को कारण बताकर जवाब लेने और समिति की बैठक के बाद ही निर्णय होना चाहिए था लेकिन बिना सुनवाई दो बिडर्स को बाहर कर दिया गया और बाकी दो के फाइनेंशियल बिड खोलकर अगले दिन वर्क ऑर्डर जारी हो गया मामला 4.95 करोड़ रुपए के टेंडर का है पीडब्ल्यूडी डिवीजन – 1 भोपाल ने निविदा आईडी के तहत लाल परेड ग्राउंड में टेंट आदि व्यवस्था के लिए ई – टेंडर बुलाया था यह टू – कवर सिस्टम का टेंडर था , जिसमें पहले टेक्निकल फिर फाइनेंशियल बिड खोली जानी थी नियमानुसार टेक्निकल बिड में रजिस्ट्रेशन , एफ़िडेविट , अनुभव , टर्नओवर और जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद ही पात्र ठेकेदारों की फाइनेंशियल बिड खोली जाती है इसमें 4 बिडर्स ने हिस्सा लिया था |

नियमों के मुताबिक यदि किसी को अयोग्य किया जाता है तो उसे ईमेल के जरिए कारण बताना अनिवार्य होता है इसके बाद चीफ इंजीनियर की अध्यक्षता वाली कमेटी को पोर्टल पर रिजेक्शन मिनट्स अपलोड करने होते हैं इस मामले में कमेटी के निर्णय की जगह पोर्टल पर केवल कमेटी सदस्यों की सूची ही अपलोड की गई आरोप है कि जिस ठेकेदार को काम मिला उसने इस टेंडर के साथ आवश्यक एफ़िडेविट भी प्रस्तुत नहीं किया था इसके बजाय दूसरे टेंडर का हलफनामा लगाया गया जो नियमों के अनुसार मान्य नहीं माना जाता |

भोपाल संभाग चीफ इंजीनियर संजय मस्के ने कहा – ई टेंडर में सब स्पष्ट है कि क्या दस्तावेज़ देना है इतना तो देख सकते हैं जहां तक डिस्क्वालिफाई को तीन दिन समय देना मेल पर जवाब लेने और मिनट्स अपलोड करने की बात है तो उन्होंने टेंडर शर्तों के मुताबिक पोर्टल पर क्यों जमा नहीं किया |

लोक निर्माण विभाग डिप्टी सेक्रेटरी एआर सिंह ने कहा – नेचुरल जस्टिस है जिसे डिस्क्वालिफाई किया गया है उसे बताना तो चाहिए कि उसे क्यों आयोग घोषित किया गया ताकि वह अपना जो पक्ष रखे उस पर समिति निर्णय ले |

 

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