भोपाल(सैफुद्दीन सैफी)
प्रदेश में कुछ बुद्धिभ्रष्ट तत्वों ने इन दिनों दो तरीकों से चौथ वसूली को अपना धंधा बना लिया है।
जिसमें एक कोर्ट में पी आई एल यानी जनहित याचिका लगा कर किसी भी संस्थान को कोर्ट में घसीटना और दूसरा सूचना के अधिकार का बेजा इस्तेमाल कर बदनामी का डर दिखाकर अधिकारियों से मोटी रकम ऐठना सूचना के अधिकार का तो इतना ज्यादा कुछ लोग इस्तेमाल कर रहे है कि पीड़ितों के लिए ये चूसने का अधिकार बनकर रह गया हैं
अब बात आती हे उच्च शिक्षा संस्थानों के मालिकों से कैसे कुछ लोग कोर्ट में पीआईएल लगाकर इसको एक बेजा धन वसूली का आसान तरीका बना लेते है ।पिछले कुछ महीनों से तथाकथित यूट्यूबर के स्वनाम धन्य या तथाकथित पत्रकार प्रदेश का नामी गिरामी शिक्षा संस्थान एल एन सी टी ग्रुप के बारे में ऊलजलूल खबरें प्रकाशित कर संस्थान की उच्च छवि पर धब्बे लगाने के काम में लिप्त है।जबकि प्रदेश के कई बड़े शहरों जिसमें इंदौर भोपाल ग्वालियर में गत ३० वर्षों में एल एन सी टी ग्रुप ऑफ एजुकेशन ने कई इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेज की स्थापना कर प्रदेश सहित पूरे देश में शिक्षा के क्षेत्र में गौरवशाली कार्य किया हैं दूसरी सब से उल्लेखनीय बात ये कि विभिन्न कालेज और यूनिवर्सिटी बना कर प्रदेश के हजारों युवाओं को अपने शीर्ष संस्थानों में नौकरियों दे कर रोजगार प्रदान कर एक मिसाल भी कायम की है। मगर सोशल एक्टिविस्ट और पत्रकारिता का चोला ओढ़कर कुछ लोगों ने पी आई एल और चूसना के अधिकार(सूचना का अधिकार) की आड़ में समाज और प्रदेश हित में काम करने वाले लोगों को परेशान कर उनकी छवि खराब करने का एक धंधा बना लिया है।
प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से ये अपेक्षा की जाती हैं कि प्रदेश में वो ऐसे तत्वों पर कड़ी निगरानी और शिकंजा कसने का काम करे जो अच्छा कार्य करने वाले समर्पित लोगो को परेशान कर के चौथ वसूली में लिप्त है।