भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश राजधानी के जेपी जिला अस्पताल में नसबंदी कराने के लिए 18 दिसंबर को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एक महिला को लेकर अस्पताल पहुंची थी जिसकी महिला की नसबंदी डॉक्टर परवेज़ खान ने कि थी पर्चे पर 7 दिन बाद आने का लिखकर उसे घर भेज दिया गया घर पहुंचने पर हालत बिगड़ने लगी अस्पताल से मिली दवाएं लेने के बाद भी कोई असर नहीं हुआ तो महिला निजी अस्पताल पहुंची यह हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ मामले ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही की पोल खोल दी यहां पता चला कि महिला के पेट में ऑपरेशन के बाद टांके ही नहीं लगाए गए सिर्फ ड्रेसिंग कर उसे भेज दिया गया था |
पति ने बताया कि 25 दिसंबर को वे पत्नी को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचे वहां डॉक्टरों ने जब पेट की ड्रेसिंग खोली तो हैरान रह गए डॉक्टरों ने बताया कि नसबंदी ऑपरेशन के बाद पेट पर टांके ही नहीं लगाए गए थे सिर्फ ऊपर से पट्टी कर दी गई थी बड़ी बात यह है कि जेपी अस्पताल द्वारा दी गई पर्ची में साफ लिखा था कि 7 दिन बाद टांके कटवाने आना है लेकिन हकीकत यह थी कि टांके डाले ही नहीं गए थे निजी अस्पताल की महिला डॉक्टर ने तुरंत टांके लगाए और दोबारा ड्रेसिंग की तब जाकर महिला की हालत में सुधार शुरू हुआ साथ ही निजी अस्पताल की डॉक्टर ने पर्चे पर यह लिखा कि ड्रेसिंग खोलने के बाद देखा गया कि टांके नहीं लगे थे हमने टांके लगाए है महिला को 7 दिन बाद टांके कटवाने आना है |
वहीं जब निजी अस्पताल की डॉ. ज्योति जैन से इस पूरे मामले को लेकर बात की गई तो उनका कहना था कि महिला को कुछ ज्यादा परेशानी थी वह जब आई थी तो उसने हमसे कहा था कि टांके आप ही काट दीजिए मैं जेपी अस्पताल तक नहीं जा सकती जब हमने ड्रेसिंग खोलकर देखी तो वहां टांके नहीं थे पूरा घाव खुला था हमारे यहां 2 टांके डाले गए हैं |
जेपी अस्पताल डॉ परवेज़ खान ने कहा – महिला नसबंदी में अब ऑपरेशन के बाद टांके नहीं लगाए जाते क्योंकि घाव बड़ा नहीं होता है इसलिय ड्रेसिंग ही की जाती है टांके काटने की बात पर्चे पर गलती से लिखी थी अगर महिला की हालात बिगड़ रही तो उसे बुलाकर इलाज किया जाएगा |
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