भोपाल ( कशिश मालवीय ) जहरीली हवा का असर अस्पतालों में देख रहा है हवा का हाल ऐसा है कि राजधानी भोपाल में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ने से अस्पतालों में सांसों से जुड़े मरीजों की भीड़ बढ़ रही है वायु प्रदूषण की तेज रफ्तार से लोग सांस लेने की समस्या से जूझ रहे हैं सोमवार को ही शहर का एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया बढ़ते प्रदूषण से सांस लेने में दिक्कत के मरीजों को 108 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है इसकी संख्या हर वर्ष बढ़ रही है एक्सपटर्स का कहना है यदि समय रहते उपाय नहीं किए गए तो ग्रीन सिटी माने जाने वाला भोपाल तेजी से दिल्ली जैसे हालात में पहुंच जाएगा बेतरतीब निर्माण और धूल यहां की फिजां को बिगाड़ रही है। शहर के मुख्य मार्ग खुदे पड़े है, सर्विस सड़क लावारिस है वहीं भोपाल में 20 वर्ष से भी अधिक पुराने वाहन तेजी से दौड़ रहे हैं। कंडम वाहन इस प्रदूषण को बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे हैं शहर में प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि यह प्रदेश का दूसरा सबसे प्रदूषित क्षेत्र बन गया है |
गांधी मेडिकल कॉलेज प्रोफेसर रेस्पीरेट्री मेडिसिन डॉ. लोकेंद्र दवे ने बताया कि प्रदूषण के चलते फेफड़ों से संबंधित समस्याएं बढ़ी हैं धूल के महीन कण शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और फेफड़ों को संक्रमित करते हैं ये सूक्ष्म कण हमारे नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर देते हैं इसके कारण सिर भारी होने के साथ ही शरीर के अलग – अलग अंगों में तनाव होता है |
क्षेत्रीय अधिकारी ब्रजेश शर्मा ने कहा – वायु प्रदूषण का मुख्य कारण वाहनों का धुआं और धूल है इस कारण ही एक्यूआई प्रभावित होता है इसे रोकने के लिए कंडम वाहनों को अलग करने सहित दूसरे उपाय हो रहे हैं |
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