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बेसहारा दिवयांग जनो के कल्याण के करोड़ो रुपए डकार गए भ्रष्टाचारी…. जनसम्पर्क संचालनालय और मध्य प्रदेश माध्यम के अधिकारियों पर भी उठ रहे सवाल…..


भोपाल ( सैफुद्दीन सैफी)  मुख्यमंत्री मोहन यादव के अधीन विभाग मध्यप्रदेश माध्यम और जनसम्पर्क संचालनालय विवादो के घेरे में है। इन विभागो ने आइरन फ्रेम होर्डिंग ,नुक्कड़ नाटक और प्रचार संबंधी अन्य कार्यो के नाम पर नीलम ट्रेडर्स सहित कुछ एजेंसियों को करोड़ो का भुगतान कर दिया। जबकि कई जिलों के कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र ( वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट ) फर्जी पाये गए। जिन जिलों में कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया है,वहाँ के संबंधित अधिकारियों ने  कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने से इंकार किया। ऐसे में बड़ा सवाल यह है, कि जब जमीनी स्तर पर कार्य पूर्णता कि पुष्टि नही हुई तो भूगतान किस आधार पर जारी किया गया।

दरअसल प्रदेश में शासकीय विभागों के प्रचार –प्रसार के कार्य के लिए जनसम्पर्क संचालनालय और मध्यप्रदेश माध्यम आधिक्र्त एजेंसिया है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग जन सशक्तिकरण संचालनालय द्वारा भी अपनी विभिन्न योजनाओ के प्रचार प्रसार के लिए इन्हीं दो एजेंसियों को काम दिए गए इन दोनों एजेंसियो कि ज़िम्मेदारी थी कि जो इम्पेन्ल्ड़ संस्थाए ये काम कर सकती थी उन्हे ही कार्य सौपा जाना था मगर मध्य प्रदेश माध्यम मे पदस्थ राकेश गौतम एवं जनसम्पर्क संचालनालय मे  अपर संचालक संजय जैन ने चिन्हित कंपनियों को खासतौर पर नीलम ट्रेडर्स को करोड़ो का काम दिया। तत्पाश्चात सबन्धित एजेंसी को बिना पूरा काम किए  ही भुगतान प्राप्त हो गया फर्जी प्रमाण पत्रो को आधार बनाकर फायनल भुगतान का एप्रूवल सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण संचालनालय  ने ही आयुक्त सोनाली वायगंणकर कि देखरेख मे किया यानि करोड़ो रुपयो को तीनों विभागो के अधिकारियों ने अपनी ज़ेबो मे भरा? ये भी गौरतलब है, कि संबंधित कार्य इसी सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग जन कल्याण विभाग से जुड़े प्रचार अभियानो के अंतर्गत किए गए, ऐसे मे विभाग कि आयुक्त सोनाली वायगंणकर  पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

यह मामला समान्य वित्तीय गड़बड़ी का नहीं बल्कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग जन कल्याण से जुड़े संसाधनो का है, उन विशेष नागरिकों का है जिन्हे पीएम मोदी द्वारा भी विशेष मानकर प्राथमिकता देने कि बात कही गयी है।

यदि उन्हीं दिव्यांग जनो के नाम पर स्वीकरत धनराशि का गबन हुआ है तो यह नैतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर गंभीर अपराध है। क्या इस पूरे मामले को प्रदेश के मुखिया मोहन यादव निष्पक्ष जांच करवाकर न खाऊँगा न खाने दूंगा वाले मोदी जी के बयान को सच साबित कर के दिखाएंगे?

 

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