भोपाल ( सैफुद्दीन सैफी) अभी तक आम जनता को यह भ्रम था कि देश में सबसे ज्यादा नकारा निकम्मा और भ्रष्टतंत्र है तो वो पुलिस का है , लेकिन अब आम जनता को लगने लगा है कि निकम्मेपन और आम लोगों की जान से खेलकर अपनी जैबे भरने वाले कोई है तो उसमे मध्यप्रदेश में नंबर एक पर स्वास्थ्य तंत्र है , जिनको रिश्वतखोरी और हराम की कमाई की इतनी लत लग गई है उन्हें यह भी अहसास नहीं है कि इससे प्रदेश की आम जनता के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
पूरे देश को कफ पीने से बच्चों की हुई मौतों के मामले में बदनाम मध्यप्रदेश का हेल्थ सिस्टम किस तरह से भ्रष्टाचार के बीच के ऊपर से नीचे तक लिप्त है इसकी कलई धीरे – धीरे खूल रही है | बिना लैब टेस्ट के कफ सिरप कोल्ड्रिफ छिंदवाड़ा में 23 बच्चों को मौतों के आगोश मैं सुला दिया उसके पीछे स्वास्थ्य विभाग मेँ फैला कमीशन खोरी का कूकर्म शामिल था |
सिरप की कीमत का 60 % हिस्सा कमीशन में बंटता था और सबसे अधिक फायदा बच्चों को यह दवा लिखने वाले डॉ. प्रवीण सोनी और उनके परिजनों को होता था | कोल्ड्रिफ सिरप की एमआरपी 89 रुपए थीं लेकिन इसमें से 54 रुपए कमीशन में बंटा | कंपनी ने छिंदवाड़ा में सतीश वर्मा को बतौर एमआर नियुक्त किया था उसे 30% कमीशन मिलता था , वर्मा इसमें से 10% हिस्सा डॉ. सोनी को देता था और 20% रकम खुद रखता था , वह करीब 17 साल से सिरप कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स से जुड़ा था | कोल्ड्रिफ बिक्री में डॉ. सोनी का परिवार शामिल था | छिंदवाड़ा में स्टॉकिस्ट न्यू अपना मेडिकल स्टोर को 10% कमीशन मिलता था | परासिया में अपना मेडिकल स्टोर की संचालिका डॉ. सोनी की पत्नी ज्योति को 20% कमीशन दिया जाता था |
फैक्ट्री में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल ( डीईजी ) जांच के लिए गैस क्रोमैटोग्राफी मशीन नहीं थी | बिना जांच सिरप पैक कर बाजार भेजा गया | 900 से अधिक बोतलें मप्र , तमिलनाडु , पुडुचेरी और ओडिशा भेजी गईं | केमिकल एनालिस्ट के. माहेश्वरी ने पुलिस की पूछताछ में यह स्वीकार किया |
परासिया एसडीओपी जितेंद्र जाट ने बताया कि कोल्ड्रिफ सिरप के मामले में डॉ. सोनी की पत्नी ज्योति की गिरफ्तारी के लिए टीमें जुटाई गई हैं |
Lok Jung News Online News Portal