नई दिल्ली / सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने हाई कोर्ट के जजों के तबादलों में सरकार के दखल पर गंभीर चिंता जताई है | पुणे में शनिवार को एक व्याखायान के दौरान जस्टिस भुइयां ने कहा कि जजों का तबादला सिर्फ न्याय के प्रशासन के लिए होना चाहिए न कि सरकार के विरुद्ध आदेशों की सजा के रूप में होना चाहिए | जस्टिस उज्ज्वल भुइयां मप्र हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन के ट्रांसफर के बहाने हाई कोर्ट जजों के तबादलों में सरकार के हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल उठाए हैं उन्होंने कहा कि अगर कॉलेजियम खुद यह दर्ज करता है कि किसी जज का ट्रांसफर केंद्र सरकार के अनुरोध पर किया गया तो यह न्यायिक प्रक्रिया में कार्यापालिका के हस्तक्षेप की साफ स्वीकारोक्ति है
जस्टिस भुइयां ने कहा ट्रांसफर और पोस्टिंग में कार्यापालिका की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए न्यायिक तबादले केवल न्याय के बेहतर प्रशासन के लिए होते हैं हालांकि जस्टिस भुइयां ने जजों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली का बचाव भी किया उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था उस दौर की उपज है, जब न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार का अत्यधिक दखल गंभीर चिंता का विषय बन गया था | उन्होंने चेतावनी दी कि अगर न्यायपालिका की विश्वसनीयता खत्म हो गई तो संस्था भीतर से खोखली हो जाएगी भले ही कोर्ट औपचारिक रूप से काम करती रहें जज रहेंगे अदालतें रहेंगी लेकिन उनका दिल व आत्मा खत्म हो जाएगी |
जस्टिस अतुल श्रीधरन का मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि मप्र हाई कोर्ट में नियुक्ति के बाद महज 7 महीनों में उनका तीन बार ट्रांसफर आदेश हुआ इतने कम समय में बार तबादला होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जाता है |
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