
भोपाल( सैफ़ुद्दीन सैफ़ी) बरगी बांध में हुआ हादसा महज एक इत्तेफाक नहीं बल्कि सिस्टम की घोर आपराधिक लापरवाही का साक्षात प्रमाण है। खराब मौसम की साफ चेतावनी के बावजूद पर्यटन विभाग द्वारा संचालित क्रूज का सैलानियों को लेकर पानी के बीचो-बीच जाना यह साबित करता है, की सुरक्षा मानको की किस कदर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सच तो यह है कि बरगी के गहरे पानी में सिर्फ एक क्रूज नहीं डगमगाया बल्कि मध्य प्रदेश की पर्यटन संभावनाएं भी डूब गई है। इस खौफनाक मंजर के बाद अब कोई भी पर्यटक यहां नौकायन करने के लिए 10 बार सोचेगा एक और जहां प्रदेश के ऊर्जावान सी एम मोहन यादव प्रदेश को धार्मिक सहित सभी तरह के पर्यटक डेस्टिनेशन बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर लापरवाह सिस्टम उनके सपनों की उड़ान को पलीता लगा रहा है। यह जानकारी चौंकाने वाली है की प्रदेश में जल परिवहन को रेगुलेट करने वाली कोई नोडल एजेंसी ही नहीं है, सड़क पर वाहनों के लिए परिवहन और यातायात विभाग तैनात रहता है, लेकिन भोपाल के बड़े तालाब से लेकर ओंकारेश्वर ओरछा और हनुमंतिया तक पानी में फर्राटा भरती नाव, क्रूज़ और शिकारी के निज मन का कोई धनी धोरी नहीं है। झील में उतरने वाली नाव का सुरक्षा ऑडिट कौन करेगा इसका कोई नीति नियम ही नहीं बना है । बस पर्यटन के फैंसी नाम के जरिए सारी व्यावसायिक आर्थिक गतिविधियां धड़ल्ले से शुरू कर दी जाती है, लेकिन नियम कानून प्रवर्तन एजेंसी कौन है यह आज तक तय नहीं है। हकीकत यह है की रसम अदायगी के नाम पर पर्यटकों को जर्जर नाव में बिठाकर टूटी-फूटी गंदी सी लाइफ जैकेट थमा दी जाती है। बरगी की इस भयावह लापरवाही के लिए सिर्फ सेवा समाप्ति और निलंबन ना काफी है। जानबूझकर लोगों की जान खतरे में डालने वालों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज होनी चाहिए जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी तब तक पर्यटन के नाम पर यह खिलवाड़ बंद नहीं होगा।
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