भोपाल
वक्फ बोर्ड को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त कर गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तर्ज पर गठन करने की मांग
भोपाल, 1 अक्टूबर। जमीअत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने उज्जैन की शाही मस्जिद के मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मांग की है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान निर्दोष लोगों पर दर्ज किए गए सभी प्रकरण वापस लिए जाएं, निर्दोष व्यक्तियों को तत्काल रिहा किया जाए और मारपीट के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हाजी मोहम्मद हारून ने वक्फ बोर्डों के गठन, वक्फ संपत्तियों और मस्जिदों के संरक्षण सहित उज्जैन की हालिया घटनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही सरकारों के प्रभाव में गठित होते रहे वक्फ बोर्डों के कारण पूरे देश में वक्फ संपत्तियों को बहुत नुकसान हुआ है। जमीअत उलमा-ए-हिंद की मांग रही है कि वक्फ बोर्ड को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त कर सिख समुदाय की गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तर्ज पर गठित किया जाए, ताकि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा स्वतंत्र रूप से की जा सके।
उज्जैन की शाही मस्जिद के विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में मंदिरों और मस्जिदों को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्यों के लिए रास्ते निकालने की परंपरा रही है। हमारे देश में मंदिर और मस्जिद के लिए रास्ते बनाए जाते हैं, लेकिन विभिन्न स्थानों पर रास्तों के विस्तार और कॉरिडोर के नाम पर मस्जिदों को तोड़े जाने की घटनाएं चिंता का विषय हैं। सरकार और प्रशासन को किसी भी धार्मिक स्थल के संबंध में कार्रवाई से पहले सभी संभावित वैकल्पिक उपायों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने उज्जैन की तकिया मस्जिद का उल्लेख करते हुए कहा कि उसे महाकाल मंदिर की पार्किंग के नाम पर तोड़ दिया गया, जबकि यह मस्जिद पार्किंग क्षेत्र से काफी दूर स्थित थी। उनके अनुसार पार्किंग के लिए अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी की जा सकती थीं। उन्होंने कहा कि शाही मस्जिद के मामले में भी रास्ता चौड़ा करने के लिए मस्जिद के सामने स्थित संदल वाली इमारत को अधिग्रहित करने और उसके मालिक को उचित मुआवजा देने जैसे विकल्प मौजूद थे। मुस्लिम समाज भी आवश्यकता पड़ने पर इस संबंध में सहयोग के लिए तैयार था।
हाजी मोहम्मद हारून ने आरोप लगाया कि शाही मस्जिद के संबंध में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के साथ प्रशासन ने मारपीट की और बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारियां कीं। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, सभी प्रकरण वापस लिए जाएं तथा निर्दोष व्यक्तियों को तत्काल रिहा किया जाए।
उन्होंने आगे कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार उज्जैन में कई अन्य मस्जिदें भी प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाइयों की सूची में शामिल हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि कॉरिडोर, सड़क या अन्य विकास संबंधी आवश्यकताओं के लिए मंदिर हो या मस्जिद, उन्हें तोड़ने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्थाएं तलाशने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं और उज्जैन प्रशासन की ऐसी कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
भवदीय
मोहम्मद कलीम खान एडवोकेट
सचिव, जमीअत उलमा मध्य प्रदेश
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