भोपाल ( कशिश मालवीय ) राजधानी के गांधी मेडिकल में छात्रों के बीच मारपीट का 4 दिसंबर को मामला सामने आया था , मामला यह था कि सेकंड ईयर एमबीबीएस छात्र के साथ उसके बैचमेंट हॉस्टलर्स के आरोपी छह छात्रों ने मारपीट की थी | एमबीबीएस छात्र पारस मरैया ने छह छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी | लेकिन मामले ने नया मोड़ ले लिया , अब उसी शिकायतकर्ता छात्र ने पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा को आवेदन देकर अपनी शिकायत वापस लेने की इच्छा जताई है |
पारस ने आवेदन में कहा है कि एसआईआर में जिन 6 छात्रों के नाम शामिल किए गए थे , उन्होंने उसके साथ कोई मारपीट नहीं की थी | उसने स्पष्ट किया कि वह घटना से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है और जिन युवकों ने वास्तव में मारपीट की थी , उन्हें वह पहचानता भी नहीं है | इसके साथ ही , जिन छात्रों पर एफआईआर दर्ज हुई थी , उन्होंने भी पुलिस को आवेदन देकर कहा कि उनका कोई विवाद नहीं हुआ |
इस मामले में पुलिस ने पहले ही शिकायतकर्ता और आरोपित छात्रों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजे थे | अब पुलिस पूरे मामले की चार्जशीट तैयार करेगी , जिसके बाद ही कोर्ट में आगे की कानूनी कार्रवाई संभव हो पाएगी |
पारस ने एफआईआर में यह भी बताया था कि वह सेकंड ईयर का एमबीबीएस छात्र है और डे – कॉलर के रूप में कॉलेज आता है | 4 दिसंबर की रात लगभग 1:15 बजे वह अपने सीनियर युगीन चौधरी और बैचमेट निधि तोमर के साथ कॉलेज कैंटीन पहुंचा था | वहां पहले से मौजूद उसके बैचमेंट हॉस्टलर्स पुष्पेंद्र सिंह ने फोन कर कुछ छात्रो को बुलाया और कहा कि डे – कॉलर देर रात कैंटीन में आए हैं | कुछ ही मिनटों में अजय ब्राहंणे , शिवम महावर , देव रघुवंशी , विवेक मालवीय और अमन पांडे कैंटीन पहुंचे | पारस के अनुसार आते ही इन छात्रों ने उसके साथ गालियों और धमकियों की शुरुआत की थी , जब उसने विरोध किया , तो सभी उस पर टूट पड़े और मारपीट करने लगे अमन पांडे ने लोहे की रॉड लेकर पारस के सिर पर वार किया , जिससे वह खून से लथपथ हो गया | पारस को बचाने के लिए आगे आए सीनियर छात्र युगीन चौधरी पर भी हमला किया गया | घटना के दौरान मौके पर मौजूद छात्रा निधि तोमर और छात्र तरुण ने मारपीट रोकने की कोशिश की थी | उस समय पारस ने पुलिस को पूरी घटना का ब्योरा देकर छह छात्रों पर एफआईआर कराई थी |
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