भोपाल ( कशिश मालवीय ) मप्र कि राजधानी भोपाल के जाने –माने संस्थानों में गिना जाने वाला एम्स में डॉ. रश्मि वर्मा के ख़ुदकुशी प्रयास मामला सामने आने के बाद एम्स एक बार फिर गंभीर आरोपों से घिरा महिला डॉक्टरों की सुरक्षा मानसिक प्रताड़ना , कथित यौन उत्पीड़न अवैध निजी प्रैक्टिस और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एम्स प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है कांग्रेस के झुग्गी – झोपड़ी प्रकोष्ठ और मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनिकेत व्दिवेदी ने बुधवार को को एम्स निदेशक के नाम ज्ञापन सौंपते हुए हालात को मानवीय और संवैधानिक दोनों स्तर पर चिंताजनक बताया आरोप लगाया गया कि एम्स में महिला डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कार्यस्थल असुरक्षित हो चुका है |
अनुशासन के नाम पर मानसिक दबाव स्वतंत्रता पर अंकुश और कथित यौन उत्पीड़न के मामलों को दबाया जा रहा रहा है कांग्रेस का दावा है कि इसी कथित प्रताड़ना के चलते 12 दिसंबर को ट्रोमा और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ने एनेस्थीसिया की ओवरडोज़ लेकर आत्मह्त्या की कोशिश की ज्ञापन में कहा गया कि डॉ श्रुति दुबे डायलिसिस टेक्नीशियन उन्नति सिमोन , फरहीन अंजुम , रेखा ठाकुर और ऑफिस असिस्टेंट संध्या सिमोन को मानसिक प्रताड़ना के कारण संस्थान से बाहर होना पड़ा कांग्रेस का दावा है कि सभी पीड़िता महिलाएं है जबकि कथित दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कि गई कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह मामला किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है | यहाँ ये भी गौर तलब है कि जब से भोपाल मे एम्स कि स्थापना हुई है तब से ही ये संस्थान इलाज मे लपारवाही, भ्रष्टाचार डोकटरों का मरीजो के साथ बुरा बर्ताव जैसे अनेकों मामले सामने आए है ऐसा नही कि ये सब घटनाओ कि जानकारी एम्स प्रशासन के उच्च स्तर तक नही आ रही हो मगर ना जाने सख्त कार्यवाही के नाम पर एम्स प्रशासन के हाथ किसने बांधे हुए है ये समझ से परे है
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