भोपाल ( कशिश मालवीय ) महंगाई की मार अब दवाइयों तक पहुंचने वाली है यदि आप नियमित रूप से दवाइयां लेते हैं तो यह खबर आपके लिए चिंताजनक है आने वाले दो – तीन हफ्तों में मामूली बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाइयां महंगी हो सकती हैं | ईरान – इजरायल युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हुई है जिससे जरूरी दवाओं का कच्चा माल 166% तक महंगा हो गया है अगर यह तनाव लंबा खिंचा तो बाजार में दवाओं की कीमत करीब 30% तक बढ़ सकती हैं |
मध्यप्रदेश की छोटी – बड़ी 200 से ज्यादा फार्मा कंपनियां कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं युद्ध के कारण शंघाई पोर्ट से मुंबई तक आने वाले जहाज अब सुरक्षित रस्तों के चक्कर में 30 – 40 की जगह 80 – 90 दिन ले रहे हैं | शिपिंग लागत 15 रु से बढ़कर 40 रु किलो पहुंच गई है कारोबारियों का दावा है कि लागत दोगुनी होने की वजह से कीमतों में इजाफा करना पड़ेगा दवा बाजार के जानकारों के मुताबिक फिलहाल पहला असर जेनेरिक दवाओं और केमिस्ट की दुकानों पर मिलने वाले डिस्काउंड पर पड़ा है जो दवाएं पहले 10-20 % छूट पर मिल जाती थीं अब वे एमआरपी पर बिक रही रहीं आने वाले 15-20 दिनों में एथिकल और सर्जिकल सामान भी मांगे होने की कगार पर हैं |
बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी कहते हैं कि कच्चे माल की कमी और बढ़ते माल भाड़े ने दवा उद्दोग को बैकफूट पर धकेल दिया है केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ के मुताबिक देश में इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है अगले 15 से 20 दिन में असर दिखने लगेगा |
रोज दावा लेने वाले मरीजों पर ज्यादा असर पड़ेगा जैसे अगर किसी परिवार में दो बुजुर्ग का मासिक खर्च 3000 हजार है तो डिस्काउंड खत्म होने और नई कीमतों के बाद यह 3800 से 4000 तक पहुंच सकता है कच्चा माल महंगा होने पर टेंडर वाली चोटी कंपनियां सप्लाई से पीछे हट सकती हैं इससे सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं की कमी हो सकती है |
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