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गवाही के आगे फेल हुई धमकियां साधारण कांस्टेबल ने दिलाई बड़े अफसरों को मौत की सजा…..


चेन्नई / वर्दी का फर्ज सिर्फ हुक्म मानना नहीं बल्कि न्याय का साथ देना भी है  एक तरफ रसूखदार पुलिस महकमा था और दूसरी तरफ न्याय की पुकार थी तब कांस्टेबल रेवती ने डगमगाने के बजाय फर्ज का रास्ता चुना और इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ितों के पक्ष में खड़े होकर अपने ही विभाग के पुलिसकर्मियों के अपराध की पोलखोल दी अपनी नौकरी और सुरक्षा को दांव पर लगाकर इंसाफ के लिए दी गई रेवती की गवाही ने आज देश में इतिहास रच दिया | तमिलनाडु के सथानकुलम कस्टोडियल मौत के मामले में 6 साल बाद मदुरै कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई यह फैसला न्याय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस पूरे मामले में 43 वर्षीय हेड कांस्टेबल रेवती का नाम  सबसे ज्यादा चर्चा में रहा रेवती की बहदुरी और सच्चाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने इस केस को मुकाम तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई दो बेटियों की मां ने धमकियों से डरे बिना सच का साथ निभाने का फैसला लिया और न्याय की राह प्रशस्त की | घटना जून 2020 की है जब पूरी दुनिया कोविड की बंदिशों से जूझ रही थी थूथुकुडी जिले के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में ऐसा कुछ हुआ जिसने पूरे देश को हिला दिया पी. जयराज व उनके बेटे जे. बेनिक्स को इसलिए हिरासत में लिया गया क्योंकि उन्होंने मोबाइल शॉप तय समय से कुछ देर ज्यादा खुली रखी थी कांस्टेबल रेवती ने कोर्ट बुलाया बताया मैं रात करीब 8:50 बजे स्टेशन पहुंची उसी समय अंदर से चीखने व रोने की आवाज आई कोई चिल्ला रहा था |

रेवती ने बताया बीच – बीच में सब – इंस्पेक्टर बालाकृष्णन की आवाज सुनाई दे रही थी पुलिसकर्मियों ने जयराज व बेनिक्स को घायल होने तक पीटा उन्होंने दोनों पिता – पुत्र के निजी अंगों पर जूतों से वार किया इस दौरान वे बीच – बीच में शराब पीने के लिए रुकते और फिर दोबारा मारपीट शुरू कर देते |

जब दोनों अधमरे हो गए तो रेवती ने सहानुभूति दिखाते हुए जयराज को कॉफी देने की कोशिश की जिसे अन्य पुलिसकमियों ने छीनकर फेंक दिया फिर दोनों को निर्वस्त्र कर उनके हाथ बांध दिए गए इतनी क्रूरता न देख पाने के कारण रेवती बाहर चली गईं कुछ दिनों बाद जयराज व बेनिक्स की मौत हो गई पूरे देश में गुस्सा था पर विभाग के भीतर इस सच को दबाने की कोशिश की जा रही थी नौ प्रभावशाली पुलिसकर्मी आरोपी थे जब न्यायिक मजिस्ट्रेट एमएस भरथिदासन जांच के लिए पहुंचे तो रेवती ने उनसे कहा  ‘सर, मैं आपको सब कुछ बताऊंगी हर एक बात वह सच जिसे छिपाया जा रहा है मैं दो छोटी बच्चियों की मां हूं क्या आप मेरे दो बच्चों और मेरी नौकरी की सुरक्षा की गारंटी दे सकते हो  ?

साथ अधिकारियों की चेतावनी के बावजूद रेवती ने बोलने का फैसला किया यह ऐसी फोर्स में असाधारण कदम था जहां किसी कर्मी का साथियों के खिलाफ गवाही देना कम ही देखने को मिलता है | डर जायज था बयान दर्ज कराते वक्त बाहर जमा पुलिसकर्मी कोर्ट के स्टाफ को धमका रहे थे और रेवती पर फब्तियां कस रहे थे तनाव इतना था कि मजिस्ट्रेट को सुरक्षा गार्ड तैनात करना पड़ा सुरक्षा का भरोसा मिलने के बाद ही रेवती हस्ताक्षर के लिए तैयार हुईं सीसीटीवी फुटेज में हर आरोपी की पहचान की उनकी मिनट – दर – मिनट की गवाही ने पुख्ता कर दिया कि उस रात थाने में कौन मौजूद था और दोनों की मौत के जिम्मेदार कौन थे रेवती का यह साहस न्याय की नींव बना | और रेवती के इस साहसपूर्ण कदम से कानून और न्याय उन 9 पुलिस वालों के गिरहबान तक पहुंच सके जिन्होंने कानून अपने हाथ मे लेकर मासूमों को मौत के घाट उतारा था।

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