मुरैना / मध्यप्रदेश के मुरैना में एक चौंकाने वाला हादसा सामने आया है यहां कानून को ठेंगा दिखाते हुए माफियाओं ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं बुधवार तड़के नेशनल हाइवे पर अवैध खनन रोकने के लिए ड्यूटी कर रहे वन विभाग के दल पर रेत माफिया ने जानलेवा हमला किया | ट्रैक्टर को रोकने का प्रयास कर रहे वनरक्षक को दबंगों ने ट्रैक्टर से बुरी तरह रौंद दिया जिससे मौके पर एक जवान की मौत हो गई |
वन विभाग की टीम रेत से भरे ट्रैक्टरों पर कार्रवाई के लिए निकली थी रानपुर तिराहे पर ट्रैक्टर दिखते ही रेंजर ने गाड़ी लगातार उन्हें रोकने के निर्देश दिए वनरक्षक हरिकेश डंडा लेकर ट्रैक्टर रोकने आगे बढ़े उन्हें देख आरोपी विरोद कोरी ने पहले ट्रैक्टर धीमा किया फिर अचानक पहिए उठाकर हरिकेश को टक्कर मारी गिरने के बाद उसने ट्रैक्टर उनके सिर से गुजार दिया इस दौरान रेंज ऑफिसर वीर कुमार तिर्की , वनरक्षक शत्रुघ्न सिंह , अवधेश कुशवाह , विनोद माहौर व हरिकेश का साला गौरव भी मौके पर मौजूद थे |
हत्या के बाद आरोपी 1 किमी दूर शिववैकुंठ फिलिंग स्टेशन पहुंचा यहां कपड़े बदले और कर्मचारियों से कहा – पुलिस पीछे लगी है इसके बाद ट्रॉली से रेत खाली कर 4 किलो दूर दिमनी थाने के सामने से निकल गया और माता बसैया इलाके में ट्रैक्टर छोड़ फरार हो गया बाद में पुलिस को ट्रैक्टर लावारिस मिला |
हरिकेश पहले एथलीट थे 2019 में फॉरेस्ट विभाग में नौकरी लगी थी 4 महीने पहले ही मुरैना में पदस्थ हुए थे उनके पीछे पत्नी लवली 4 साल की बेटी तन्वी और 2 साल का बेटा तन्मय है राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया बेटे ने ही पिता को मुखाग्नि दी |
वनकर्मी संदीप गुर्जर और अन्य ने आवेदन देकर बताया कि ट्रैक्टर का संचालन कुथियाना निवासी पवन तोमर और सोनू चौहान की पार्टनरशिप में होता है बताया जा रहा है कि पवन तोमर भाजपा दिमनी मण्डल उपाध्यक्ष व सोनू चौहान युवा मोर्चा का मण्डल मंत्री है फिलहाल पवन ने आरोपों को गलत बताया है |
मुरैना एसपी समीर सौरभ ने बोले – घटना के समय ट्रैक्टर विनोद कोरी चला रहा था उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है ट्रैक्टर भी जब्त हो गया है आरोपी भी जल्द पकड़ा जाएगा जिन लोगों के नाम फॉरेस्ट गार्ड ने बयानों में लिए हैं जांच के बाद उनको भी एफआईआर में जोड़ दिया जाएगा | सवाल उठता है कि रेत माफिया इसके पहले भी कई बार इस तरह कि घटनाओ को आंजाम दे चुका है कई अफसर कर्मचारी इस गुंडागर्दी के शिकार हो चूकें है इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद राजनैतिक संरक्षण मेँ पनप रहे इस अवैध रेत और पत्थर के कारोबार को सरकार और उसका प्रशासन नकेल डालने में असफल क्यों साबित हो रहा है।
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