भोपाल ( कशिश मालवीय ) राजधानी में अब सारा काम ऑनलाइन है और बिल्डिंग परमिशन शाखा के पोर्टल पर दर्ज कॉलोनियों के आधार पर ही भवन निर्माण की परमिशन जारी की जाती है | जिससे भवन निर्माण परमिशन के लिए हजारों नागरिक हो रहे परेशान बार – बार काटने पड़ रहे दफ्तरों के चक्कर | शहर में 2500 से ज्यादा कॉलोनियां हैं और बिल्डिंग परमिशन शाखा के अपग्रेट पोर्टल ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान एप्रूवल सिस्टम ( एबीपास – 3 ) पर करीब 1000 कॉलोनियों का डेटा ही दर्ज किया गया है | ऐसे में अब भवन निर्माण परमिशन लेने में लोगों को महीनों लग रहे हैं |
जानकारी के अनुसार मकान बनाने के लिए बिल्डिंग परमिश्न लेने लोगों को सहूलियत देने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से बिल्डिंग परमिशन के पोर्टल ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान एप्रूवल सिस्टम ( एबीपास ) को अपग्रेट किया | 1 जुलाई 2025 से पहले एबीपास – 2 पर काम चल रहा था , वर्तमान में अपग्रेट वर्जन एबीपास – 3 का उपयोग हो रहा है | लेकिन , इस अपग्रेडेशन के बाद लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं | शहर की कुल 2500 कॉलोनियों का डेटा जो एबीपास – 2 पर दर्ज था , उसमें से करीब 1500 कॉलोनियों का डेटा एबीपास – 3 पर अपलोड ही नहीं किया गया है | ऐसे में नगर निगम के अथोराइज्ड आर्किटेक्ट अपने सिस्टम से बिल्डिंग परमिशन जारी नहीं कर पा रहे हैं | ऐसे लोगों के पास एक मात्र विकल्प बचता है | लोगों को बिल्डिंग परमिशन के लिए नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा में ऑनलाइन आवेदन करना पड़ रहा है | लोगों का जो काम एक दिन में आर्किटेक्ट से मिलने से ही हो जाता था , अब बिल्डिंग परमिशन में महीना भर या उससे ज्यादा समय भी लग रहा है |
पिछले साल तक लोगों के पास बिल्डिंग परमिशन लेने के लिए 3 विकल्प थे | पहले डीम्ड बिल्डिंग परमिशन , अथोराइज्ड आर्किटेक्ट से बिल्डिंग परमिशन और बिल्डिंग परमिशन शाखा में ऑनलाइन आवेदन कर बिल्डिंग परमिशन ले पाते थे | लेकिन , डीम्ड परमिशन जारी होना बंद हो गया है | अथोराइज्ड आर्किटेक्ट भी डाटा अपलोड नहीं होने के कारण बिल्डिंग परमिशन जारी नहीं कर पा रहे हैं | अब सिर्फ एक ही विकल्प बचा है ऑनलाइन आवेदन करें और निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा से परमिशन लें |
कोलार दानिशकुंज , बंजारी , राजहर्ष कॉलोनी समेत 25 से भी अधिक ऐसी कॉलोनी जो नगर पंचायत के समय अस्तित्व में आई थीं | उनका डाटा अपलोड नहीं हुआ है | इसके अलावा बाकी शहर की 1200 से अधिक कॉलोनियों का डेटा अपग्रेडेशन के दौरान अपलोड नहीं किया गया है| ऐसे में शहर के लगभग हर हिस्से की कॉलोनियों में इस तरह की परेशानी हो रही है |
एबीपास -3 डीसीआर सेल टीम लीडर बोले – कॉलोनियों का डेटा नगर निगम की ओर से यूएडीडी को उपलब्ध कराया जाता है | यूएडीडी सॉफ्टवेयर टीम को भेजती है , इसके बाद कॉलोनियों के नाम जोड़े जाते हैं | अलग – अलग तकनीकी कारणों से कुछ कॉलोनियों के नाम अभी तक नहीं जोड़े गए हैं | इस पर काम लगातार चल रहा है , पूरी कॉलोनियों के नाम कब तक जुड़ेंगे यह अभी कह पाना संभव नहीं है |
अथोराइज्ड स्ट्रक्चरल इंजीनियर राजेश कुमार चौरसिया बोले – शहर की अधिकांश कॉलोनियों का डेटा एबीपास -3 पर अपलोड नहीं किया गया है | ऐसे में जब अपने कंसोल से बिल्डिंग परमिशन जारी जारने जाते हैं तो कॉलोनी का डेटा नहीं मिलता | ऐसे में या तो डीसीआर सेल से कॉलोनी का डेटा अपलोड करना होता है | नहीं तो ऑनलाइन आवेदन करके बिल्डिंग परमिशन शाखा से परमिशन लेने के लिए चक्कर लगाना पड़ते हैं |
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