भोपाल ( कशिश मालवीय ) निशातपुरा स्थित रेलवे हॉस्पिटल में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण अक्सर डॉक्टर मरीजों को अनुबंधित निजी अस्पतालों में रेफर कर देते है | जिससे यह हॉस्पिटल सिर्फ एक रेफरल केंद्र बनकर रह गया है | पिछले डेढ़ साल में रेलवे हॉस्पिटल से 5,377 मरीजों को इलाज के लिए निजी हॉस्पिटल में रेफर किया गया | रेफर करने के बाद भी इलाज पर होने वाले खर्च का भुगतान रेलवे हॉस्पिटल को ही करना पड़ता है | ऐसे में इन मरीजों पर डेढ़ साल में रेलवे हॉस्पिटल को करीब 9 करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ा | इस हॉस्पिटल में चल रहे इस रेफलर सिस्टम से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं |
पड़ताल में पता चला है कि निशातपुरा स्थित रेलवे हॉस्पिटल में मौजूद लाखों रुपए की मशीनों का सालों से उपयोग तक नहीं हो पा रहा है , इन पर वर्षों से धूल में जमी हुई है | इसके साथ ही आवश्यक मेडिकल सुविधाओं की कमी भी लगातार बनी हुई है | इस वजह से यहां का प्रशासन मरीजों को मजबूरन निजी हॉस्पिटल में रेफर कर देता है | इस सारी प्रक्रिया से रेलवे को भरी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है | जनवरी 2024 से जुलाई 2025 तक रेफर किए गए मरीजों के इलाज पर रेलवे ने करीब नौ करोड़ रुपए खर्च किए हैं , जो पूरी तरह हॉस्पिटल की लचर व्यवस्था का नतीजा है | रिकॉर्ड के अनुसार , केवल जनवरी 2024 से जुलाई 2025 तक यानी सिर्फ डेढ़ साल में ही 5,377 मरीजों को रेलवे हॉस्पिटल से अन्य निजी हॉस्पिटलों में रेफर किया गया | इनमें से अधिकांश मरीजों को पीपुल्स , एएसजी , जीयूटी और एलबीएस जैसी निजी सुविधाओं वाले हॉस्पिटलों में भेजा गया | वहीं , कुछ मरीजों ने बताया कि यहां से बाहर भेजे जाने पर भले ही पैसे का भुगतान रेलवे करे , लेकिन उनको और परिजनों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है |
शहर में केंद्र सरकार के तीन बड़े हॉस्पिटल हैं एम्स , कस्तूरबा और बीएमएचआरसी | इसके अलावा हमीदिया हॉस्पिटल में भी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं | इसके बावजूद रेलवे अस्पताल से मरीजों को गंभीर हालत का हवाला देकर सिर्फ चुनिंदा निजी हॉस्पिटलों में रेफर किया जाता है | जबकि यहां लगी इंपेनल्ड हॉस्पिटलों को सूची में सबसे ऊपर बीएमएचआरसी का नाम दर्ज है , लेकिन चौकाने की बात यह है कि इंपेनल्ड होने के बाद भी बीएमएचआरसी में मरीजों को रेफर नहीं किया जा रहा है , जबकि वहीं सभी आवश्यक जांच और उपचार सुविधाएं मौजूद हैं |
रेलवे अस्पताल हॉस्पिटल में 20 से अधिक डॉक्टरों की टीम है , इसमें से आठ विशेषज्ञ डॉक्टर हैं , इसमें चार संविदा चिकित्सक हैं | इसके बाद भी यहां से हर माह औसतन लगभग 200 से ज्यादा मरीजों को रेफरल लेटर दिया जाता है | ऐसे में हर दिन औसतन 8 से 10 मरीजों को निजी हॉस्पिटल में भर्ती करने के लिए रेफर किया जा रहा है |
निशातपुरा रेलवे हॉस्पिटल में केवल एक्स – रे और ब्लड टेस्ट जैसी सीमित जांचें ही उपलब्ध हैं बाकी सभी जरूरी जांचों और उपचार के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता है | हॉस्पिटल में सोनोग्राफी की मशीन तो मौजूद है , लेकिन डॉक्टर न होने के कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है | इसी तरह कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर भी हॉस्पिटल में नहीं हैं | रेलवे हॉस्पिटल में डॉक्टरों को लाखों रुपए का वेतन दिया जाता है , इसके बावजूद मरीजों को उपचार के लिए निजी हॉस्पिटलों में भेजा जाता है | इससे यहां आने वाली मरीजों को परेशानी हो रही है |
पश्चिम मध्य रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य निरंजन वाधवानी का कहना कि निशातपुरा स्थित रेलवे हॉस्पिटल में डॉक्टरों की इतनी बड़ी टीम होने के बाद भी मरीजों को रेफर नहीं करना चाहिए | वहीं , बहुत आवश्यकता होने पर ही मरीजों को निजी हॉस्पिटल में भेजा जाए | साल भर में हजारों की संख्या में मरीजों का रेफर करना सही नहीं है | यदि छोटी बीमारी में भी मरीज को रेफर किया जा रहा है तो फिर एक डॉक्टर को नियुक्त कर दिया जाए , जो सिर्फ रेफलर लेटर बनाए | रेलवे को इस और विशेष ध्यान देने की जरूरत है |
भोपाल रेलवे हॉस्पिटल मुख्य चिकित्सक अधीक्षक, डॉ . अजय डोगरा , बोले – मैं इस संबंध में बात करने के लिए अधिक्रत नहीं हूं , जो भी जानकारी चाहिए , पीआरओ से बात कर सकते हैं |
पश्चिम मध्य रेलवे सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव बोले – भोपाल से संबंधित जानकारी के लिए सीनियर डीसीएम से बात करें , वह आपको सही जानकारी दे पाएंगे |
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