भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश के जिला अस्पतालों में जीवन रक्षक जरूरी दवाओं और मेडिकल समान की कमी से मरीजों को इलाज में देरी हो रही यह कमी लगातार काफी लंबे समय से बनी हुई है तीन महीने पहले जिन दवाओं का ऑर्डर दिया जा चुका है , उनकी दवाओं सप्लाई भी अब तक नहीं हो पाई है रेट कॉन्टेक्ट न होने से कई जरूरी दवाओं की खरीदी भी एमपीपीएचसीएल से रुक गई है इन वजहों से प्रदेश में लगभग सभी जिलों के अस्पतालों में दवाओं का स्टॉक तेजी से खाली होता जा रहा है एमपी पब्लिक हेल्थ कॉरपोरेशन लिमिटेड एमपीपीएचसीएल में अप्रूवल के इंतजार में अटके हुए है |
गंभीर बीमारी , एलर्जी , संक्रमण , उल्टी – दस्त या इमरजेंसी उपचार में उपयोग आने वाली दवाएं मरीजों को महंगे दाम पर अस्पताल के बाहर से मेडिकल स्टोर से खरीद कर लानी पड़ रही हैं भोपाल जैसे प्रसिद्ध शहर के सरकारी अस्पताल में भी मरीजों को कई जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं यह स्थिति विशेष रूप से गरीब और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है | अस्पतालों के अधिकारियों का कहना है कि दवाओं की सप्लाई रुकने की वजह एमपीपीएचसीएलमें अप्रूवल प्रक्रिया का धीमा होना है जिला अस्पतालों में जरूरी दवाइयों की कमी के कारण आईसीयू , इमरजेंसी और गंभीर बीमारियों के वार्ड में इलाज प्रभावित हो रहा है |
भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ( सीएमएचओ ) डॉ मनीष शर्मा ने बताया कि सरकारी अस्पतालों की ओर से तीन महीने पहले ही दवाओं की मांग भेज दी थी ताकि स्टॉक खत्म न हो और मरीजों का इलाज भी प्रभावित न हो लेकिन एमपी पब्लिक हेल्थ कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से अप्रूवल न मिलने और सप्लाई बंद होने के कारण अस्पतालों में कई दवाओं का स्टॉक खाली हो गया है बच्चों को सर्दी – जुकाम , खांसी में दी जाने वाली बेसिक दवाएं तक उपलब्ध नहीं है |
राजधानी के जेपी अस्पताल में 530 प्रकार की दवाएं उपलब्ध रहनी चाहिए लेकिन मौजूद समय में लगभग 130 दवाएं पूरी तरह आउट ऑफ स्टॉक हो चुकी हैं सबसे ज्यादा कमी गंभीर मरीजों के इलाज में उपयोग होने वाले इंजेक्शन , पेन किलर , एंटीबायोटिक , एलर्जी की बेसिक दवाएं , एनएन 100 एमएल बॉटल की है जिला अस्पताल में इन दवाओं का स्टॉक ही नहीं है डॉक्टरों का कहना है कि इमरजेंसी केस में तुरंत दिए जाने वाले कई इंजेक्शन या दवाएं न होने के कारण उपचार में देरी हो रही है वहीं , मरीजों का कहना है कि उन्हें बाहर से काफी महंगे दाम पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं |
एमपीपीएचसीएल एमडी मयंक अग्रवाल ने कहा – एमपीपीएचसीएल से लगभग सभी दवाओं का रेट कॉन्टेक्ट ( आरसी ) होता है जिन दवाओं कि आरसी नहीं है उन दवाओं की खरीदी के लिए सभी अस्पतालों के पास 20 प्रतिशत बजट अलग से रहता है इसके बाद भी दवाओं की खरीदी नहीं हो रही है या अस्पतालों के पास बजट की समस्या है तो इनको लेकर हम जानकारी लेते हैं |
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