भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश राजधानी में चल रहे एसआईआर अभियान में चौंकाने वाला मामला सामने आया है मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर के कार्य के लिए अधिक संख्या में कर्मचारियों और शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है इस काम का उद्देश्य सरकारी रिकॉर्ड को ठीक करना और जरूरी पुष्टि करना है कई कर्मचारियों का कहना है कि एसआईआर ड्यूटी पहले से चल रहे काम के साथ अतिरिक्त बोझ बन गई है। एसआईआर ड्यूटी की डर ऐसा है, कि कई कर्मचारियों को हार्ट अटैक आए तो कुछ ने अत्महत्या तक कर ली है इस बीच शहर में एसआईआर की ड्यूटी से मुक्ति पाने के लिए कर्मचारी रिश्वत देकर अपनी ड्यूटी कैंसिल करा रहे हैं। जब इसकी जानकारी लगी तो शहर के तीन अलग – अलग एसडीएम कार्यालयों में सक्रिय दलालों से एसआईआर में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों का परिजन बनकर संपर्क किया और ड्यूटि कटवाने की बात की कुछ दलालों इन इस बारे में बात नहीं की जबकि 7 नंबर स्थित एमपी नगर एसडीएम कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी ने 12 हजार रुपए में ड्यूटी से छुटकारा दिलाने की हामी भरी कर्मचारियों की एसआईआर से ड्यूटी कटवाने के लिए निर्वाचन सुपरवाइजर के साथ उसके दो और दलाल एसडीएम ऑफिस में ही रहते हैं इनमें मुख्य किरदार निर्वाचन सुपरवाइज किशोर मेहरा जो मूल रूप से वन विभाग में एलडीसी है पिछले कई सालों से वह एसडीएम कार्यालय में क्लर्क के पद पर डेपुटेशन पर आया है एसआईआर के काम के लिए उसे सुपरवाइजर बनाया गया है किशोर मेहरा सभी विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटि लगता है जो कर्मचारी एसआईआर ड्यूटि ज्वाइन नहीं करते उन्हें नोटिस और अपने दो अन्य दलालों से फोन भी लगवाता है |
इस मामले में एमपी नगर एसडीएम एलके खरे से बात की गई तो उन्होंने पहले तो पूरे मामले को सुना इसके बाद कहा कि इस संबंध में अभी कुछ नहीं बोल सकता बैठकर बात करेंगे
उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने कहा – एसआईआर ड्यूटी से नाम कटवाने के नाम पर पैसों की मांग करना गलत है एमपी नगर एसडीएम से संबंधित कर्मचारी की जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।
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