भोपाल ( कशिश मालवीय ) घर में मातम था और हाथों में डेथ सर्टिफिकेट था लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने सबके होश उड़ा दिए अस्पताल से जिस नवजात को मृत बताकर सफेद कागज थमा दिए थे वह अस्पताल की फाइलों में तो मर चुका था लेकिन असल में कुछ घंटों बाद वह जिंदा पाया गया अब इसे कुदरत का करिश्मा बोले या अस्पताल की बड़ी घोर लापरवाही ? हालांकि उम्मीद ज्यादा देर नहीं टिकी अस्पताल के एनआईसीयू में 12 घंटे की मशक्कत के बाद मासूम नवजात हमेशा के लिए आंखे मूंद सो गया | ताजा मामला हमीदिया के गायनिक विभाग की लापरवाही का है डॉक्टरों ने जिस 450 ग्राम की नवजात बच्ची को मृत धोषित कर कागज – कपड़े में लपेटकर परिजनों को थमा दिया था वह दफनाने से ठीक पहले जिंदा हो उठी हालांकि नियति को कुछ और ही मंजूर था करीब 12 घंटे तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद नवजात एनआईसीयू में बच्ची ने दम तोड़ दिया |
रायसेन के बरेली निवासी परवेज पत्नी फिजा को लेकर हमीदिया पहुंचे थे बुधवार रात 7:30 बजे फिजा ने एक बच्ची को जन्म दिया वजन 450 ग्राम और समय से पहले डिलीवरी के बाद सांस न चलने पर कारण डॉक्टरों ने उसे मृत मान लिया रात 7:45 बजे डाक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित किया रात 8:15 बजे देत सर्टिफिकेट बनाकर परिजनों को थमा दिया रात 12 बजे जब पिता दफनाने के लिए कफन लपेटने लगा तो बच्ची के पेट में हलचल व सांसें चलती दिखीं इसके बाद उसे एनआईसीयू में भर्ती कराया 12 घंटे बाद गुरुवार दोपहर दम तोड़ दिया |
जूनियर डॉक्टर ने सीनियर विशेषज्ञ से सलाह नहीं ली न नवजात को सीपीआर दिया सिर्फ स्टेथेस्कोप से धड़कन जाँचकर और सांसें देखकर मृत घोषित कर दिया |
गायनिक विभाग की एचओडी डॉ. शबाना शुल्तान ने कहा कि 500 ग्राम से कम वजन वाले नवजात में गैस मूवमेंट या मांसपेशियों के रिफ़्लेक्स से हलचल दिख सकती है ऐसे मामलों में पर्याप्त निगरानी जरूरी है मामले में जांच बैठाई है |
डबल्यूएचओ के अनुसार 22- 24 सप्ताह या 500 ग्राम से कम वजन में जीवित रहने की संभावना कम होती है फिर भी हर केस में रेससिटेशन जरूरी है गांधी मेडिकल कॉलेज में डीएम नियोनेटोलॉजिस्ट की कमी भी चिंता का विषय है |
Lok Jung News Online News Portal