भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब सिर्फ प्रशासनिक ही नहीं , बल्कि एक जानलेवा बीमारी की कैपिटल बनती जा रही है विज्ञान की तरक्की और मुफ्त इलाज के दावों के बीच टीबी जैसी पुरानी बीमारी आज प्रदेश में मौत का तांडव मचा रही है इस बीमारी के कारण हर दिन 10 से अधिक घरों में मातम पसर रहा है 2025 में इलाज और निगरानी के बावजूद प्रदेश में 4000 से ज्यादा मरीजों की हो मौत गई है। प्रदेश में 1.71 लाख टीबी मरीज नोटिफाई हुए हैं पिछले साल से 1.80 लाख थे मप्र में 2024 में विशेष अभियान चलाकर टीबी मरीज चिन्हित किए गए थे ताकि ट्रांसमिशन न हो बावजूद , ट्रांसमिशन ही नहीं मौत भी जारी है चिंता की बात यह है कि मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी के 2500 से ज्यादा मामले सामने आए हैं ये ऐसे मरीज है जिन्हें टीबी हुई लेकिन इन्होंने दवा समय पर नहीं खाई | वहीं खतरनाक मानी जाने वाली एक्सडीआर – टीबी के भी करीब 5 केस प्रदेश में मिले हैं | रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीजके एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा के अनुसार , भोपाल , इंदौर , ग्वालियर और जबलपुर हाई बर्डन शहर हैं अब 6 महीने की नई बी. पाल्म रेजिमेन दवा से इलाज आसान हुआ है |
मध्यप्रदेश प्रभारी स्टेट टीबी ऑफिसर डॉ. रूबी खान ने कहती हें – टीबी उन्मूलन के लिए अब ज्यादा आक्रमण और व्यापक रणनीति बनाई है 24 मार्च से 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान चलेगा हैंडहेल्ड एक्स- रे मशीनों से गांव – गांव स्क्रीनिंग की जाएगी टीबी ही नहीं बल्कि एनीमिया , बीएमआई , ब्लड प्रेशर और शुगर की भी जांच साथ में होगी शहरों और गांवों में हाई रिस्क इलाके चिन्हित किए जाएं यह संभावित मरीजों के साथ उनके क्लोज कॉन्टैक की सक्रिय पहचान की जाएगी |
Lok Jung News Online News Portal