भोपाल ( कशिश मालवीय ) जब मेहनत का फल महीनों तक नहीं मिले तो विरोध का रास्ता चुनना मजबूरी बन जाता है, ऐसा ही एक मामला राजधानी के सबसे व्यस्त हमीदिया अस्पताल का सामने आया है यहां पिछले छह महीनों से खाली हाथ काम कर रहे रहे लिफ्ट ऑपरेटरों के सब्र का बांध भी ऐसे ही टूट गया | वेतन को लेकर इस तरह करोड़ रुपए से बना यह हमीदिया अस्पताल ऊंची दुकान फीका पकवान जैसा साबित हो रहा है यहां अस्पताल में रोज करीब 2500 मरीज आते हैं इनके साथ दो – दो परिजन भी रहते हैं यानी करीब 7 हजार लोग इस व्यवस्था पर निर्भर हैं सभी 24 लिफ्ट ऑपरेटरों को पिछले 6 महीने से वेतन नहीं मिलने पर उन्होंने गुरुवार को समूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया साथ ही लिफ्ट की चाबियां भी साथ ले गए जिसके बाद यह स्थिति बनी है हमीदिया में 720 करोड़ रुपए की लागत से बने दो 11 – 11 मंज़िला भवनों में लगी लिफ्टें या तो बंद हैं या बिना नियंत्रण के चल रही हैं जिस कारण मरीजों के साथ डॉक्टरों और स्टाफ को भी दिक्कत हो रही है |
इस संकट का सबसे ज्यादा असर इमरजेंसी और ऊपरी मंजिलों के मरीजों पर पड़ा है हार्ट पेशेंट , गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर के साथ ऊपर ले जाना बेहद मुश्किल हो गया है पहले डॉक्टरों के लिए अलग लिफ्ट थी लेकिन अब वह व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है डॉक्टरों और स्टाफ ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि इससे इलाज भी प्रभावित हो रहा है। वहीं अस्पताल में कार्यरत ऑपरेटरों के अनुसार वेतन नहीं मिलने के कारण हालात ऐसे हो गए थे कि घर चलाना मुश्किल हो गया इसलिए उन्हें काम छोड़ना पड़ा |
इस पूरे संकट की जड़ लंबित भुगतान है लिफ्ट संचालन का ठेका निजी एजेंसी को गांधी मेडिकल कॉलेज ने पीडब्ल्यूडी के जरिए दिया था इस ठेके का भुगतान सरकारी स्तर पर अटका है जिसके कारण पिछले एक साल से करीब 3.25 करोड़ रुपए एजेंसी को नहीं मिल पाए भुगतान न मिलने पर एजेंसी ने ऑपरेटरों का वेतन रोक दिया जिससे उन्होंने काम छोड़ दिया मेंटेनेंस भी उसी एजेंसी के पास था जो अब बंद है जिससे तकनीकी खराबियों का खतरा बढ़ गया है |
हमीदिया डीन डॉ. कविता एन सिंह ने कहा – मामला शासन को भेजा गया है और बजट की मांग की गई है फंड मिलने के बाद भुगतान किया जाएगा जल्द समाधान नहीं तो लिफ्ट पूरी तरह बंद होने का खतरा है |
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