भोपाल( नेहा शेख ) हजारो रुपये के धोखाधड़ी मामले में आरोपी मोहित गोगिया के सनसनीखेज दावो के बाद आबकारी विभाग मे बड़ा एक्शन हुआ है डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी दीपम रायचूरा के खिलाफ जांच समिति की रिपोर्ट आने पर आयुक्त दीपक सक्सेना ने देर रात उन्हे निलंबित कर दिया| जांच के दौरान टीटी नगर की दो शराब दुकानों के आवंटन और ट्रान्सफर प्रक्रिया मे 7 गंभीर अनियमितताएं सामने आई है| रायचूरा के सहायक आबकारी आयुक्त पद पर रहते हुए इन दोनों दुकानों का ठेका लॉटरी के जरिए जसवंत को दिया गया था| हालांकि, इनका संचालन मेसर्स मां माइंस के प्रताप धाकड़ और अन्य सहयोगीयो की और से किया जा रहा था| मामले मे गोगिया ने ठेका दिलाने के एवज मे 1 करोड़ की रिश्र्वतखोरी का आरोप भी लगाया था|
पूर्व ओएसडी रायचूरा और बैंक कर्मचारियो की साठगांठ से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले में जांच के दौरान 2.75 करोड़ की फर्जी एफडीआर और 7 बड़ी प्रशासनिक अनियमितताएं उजागर हुई है| जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों को अनुचित लाभ पहुँचने के लिए सरकारी और बैंकिंग नियमो को पूरी तरह से दरकिनार किया गया |
ई-एफडीआर और स्वीक्रति रिपोर्ट मे धोखाधड़ी: 12 मई 2024 को 2,75,53,535 की ई-एफडीआर तैयार की गई| इसके बाद 20 मई को स्वीक्रती-प्रस्तुतीकरण संलग्न किया गया और 10 अक्टूबर 2026 को इसका दोबारा सत्यापन कराया गया| हालांकि जांच में पाया गया कि स्वीक्रति रिपोर्ट पर न तो किसी अधिक्रत अधिकारी के हस्ताक्षर थे और न ही बैंक की मुहर यहां तक कि रिपोर्ट मे बैंक के किसी अधिकारी या कर्मचारियो का नाम तक दर्ज नहीं था|
लिक्विडीटी डैमेजेस और सिक्योरिटीज मे ढील: लिक्विडीटी में देरी को कवर करने के लिए नियम के विरुद्ध 22 दिनो कि छूट दी गई, लेकिन इसके एवज में कोई पेनल्टी या जुर्माना नही लगाया गया| इसके अलावा, 1,37,76,768(50% सिक्योरिटी राशि) को 20 अप्रैल 2024 तक जमा करने के बजाय 30 अप्रैल तक टाल दिया गया| शेष 50% राशि 12 मई को जमा की गई, जो स्थापित नियमो का सीधा उल्लंघन है|
पार्टनरशिप डीड और सब-कॉन्ट्रेक्ट नियमो का उल्लंघन: संबंधित फर्म मे बिना अथा रिटी लेटर या स्वीक्रत दस्तावेजों के ही पार्टनरशिप डीड जमा कर दी| 10 जुलाई 2024 को आवंटन पूरा होने के बाद, फर्म ने 27 दिसंबर को काम की सब-लेटिंग कर दी| इसमें विजय सिंह को नया पार्टनर बनाया गया, जबकि 21 फरवरी की मूल रिपोर्ट में इसका कोई उल्लेख नहीं है|
ई-बैंक गारंटी और फर्जी एंट्रीज़: 15 जुलाई 2024 को जारी की गई 76 लाख की ई-बैंक गारंटी का कोई वैध ट्रांजेक्सन रिकॉर्ड या सत्यापन मौजूद नहीं था| जांच के दौरान बैंक के अधिकारी रिकॉर्ड में इस बैंक गारंटी से जुड़ी कोई भी प्रमाणित एंट्री या रसीद नहीं पायी गई है।
अब सवाल उठता है कि ये तो आबकारी विभाग का सिर्फ एक मामला है जो कीसमय रहते पकड़ मे आ गया इसके पहले और कितने अनगिनत इसी तरह के घोटाले हुए होंगे? क्या मंत्री या उनका विभाग उसकी जांच करवाएगा।
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