भोपाल:( नेहा शेख ) सरकारी बीमा योजनाओं में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच अब संगठित अपराध के तहत की जा रही है। सीआईडी की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस पूरे खेल के पीछे बीमा कंपनी, सरकारी कर्मचारियों और नकली लाभार्थियों का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। जांच के दौरान पता चला है कि क्लेम पास करवाने के लिए फर्जी आधार कार्डो का इस्तेमाल किया गया था, जिसकी अब बारीकी से जांच होगी। सीआईडी को मिले आधार कार्डो में से घर के नंबर गायब है और सिर्फ मोहल्ले का नाम लिखा हुआ है, जबकि नियम के मुताबिक पूरा पता होना अनिवार्य होता है। जब सीआईडी की टीम जमीनी पड़ताल के लिए संबंधित पतों पर पहुंची, तो कई कथित हितग्राही मिले ही नहीं। उनके नाम-पते गलत पाए गए हैं और दस्तावेजों में दर्ज ज़्यादातर मोबाइल नंबर भी बंद आ रहे है।
पतों मे ऐसा फर्जीवाड़ा
सीआईडी की जांच में सामने आया कि इस सगंठित गिरोह ने बीमा राशि हड़पने के लिए एक ही परिवार के दो से तीन सदस्यों की मौत हफ़्तेभर से महीने भर के भीतर दिखा दी।
पॉलिसी धारक का असली ठिकाना कुछ और था, जबकि क्लेम पेपर्स में उनकी मौत किसी दूसरी जगह दिखाई गई।
क्लेम हासिल करने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र भी किसी तीसरे स्थान की लोकल बॉडी से तैयार करवाया गया था। यानी पता, मौत का स्थान और सर्टिफिकेट जारी करने वाली अथॉरिटी, तीनों में कोई तालमेल नहीं था।
सीआईडी की कार्रवाई: सीआईडी ने जांच के दौरान 121 क्लेम फाइलों में सीधे तौर पर धांधली पकड़ी है, जिसके बाद दो केस दर्ज किए गए है। लगभग 482 संदिन्ध बैंक अकाउंट्स की बारीकी से जांच चल रही है। इन खातों में बीमा का पैसा ट्रांसफर होते ही तुरंत निकाल लिया जाता था।
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