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पीएनबी से करोड़ो का फ्रॉड जीशान अली और पत्नी पर केस 526.83 वर्गमीटर जमीन का फर्जीवाड़ा ऐसे आया सामने


भोपाल( नेहा शेख ) आर्थिक प्रकोष्ठ की जांच मे बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद रॉयल हेरिटेज कॉलोनाइजर्स के डायरेक्टर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन्होने पंजाब नेशनल बैंक के साथ 2,07,86,207.48(2.07 करोड़ से अधिक) धोकाधड़ी की है।

जानिए कैसे किया गया पूरा फर्जीवाड़ा

2008 मे खरीदी समिति की जमीन: जीशान अली ने शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति के साल 2007 के टेंडर में सबसे ऊंची बोली लगाई थी। इसके बाद 5 फरवरी 2008 को बावड़ियाकला स्थित 526.83 वर्गमीटर कमर्शियल जमीन उनके नाम पर रजिस्टर्ड हो गई ।

2013 मे बेटियो को कर दी दान: 10 जुलाई 2013 को जीशान अली ने हिबानामा (गिफ्ट डीड) बनाकर यह जमीन अपनी तीन बेटियो के नाम कर दी, जो उस वक्त नाबालिग थीं। इस प्रकार वे कानूनी रूप से जमीन की मालकिन बन गई। खुद जीशान अली ने साल 2018 में बैंक को लिखे एक पत्र मे इस बात की स्वीकारा भी था।

2015 मे दान छिपाकर लिया 2 करोड़ का लोन: लीगल सर्च रिपोर्ट में नाबालिगो के हित वाले कॉलम मे ‘कोई नहीं’ दर्शाते हुए बैंक से यह तथ्य छुपाया गया कि जमीन पहले ही बेटियो के नाम दान की जा चुकी है। 24 सितंबर 2015 को रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स के नाम से 2 करोड़ की ओवरड्राफ्ट लिमिट स्वीकृत करवा ली गई।

अदालत की अनुमति न होने का नियम जानते थे: फरवरी 2015 में जीशान और नाजनीन ने नाबालिग बेटी का दूसरा प्लॉट दाखिल किया, जिससे साफ है। कि वे जानते थे कि बिना कोर्ट कि मंजूरी के नाबालिग कि संपत्ति नहीं बेची जा सकती। इसके बावजूद, ठीक छह महीने बाद उन्होने दान कि जा चुकी जमीन को गुपचुप तरीके से बैंक में बंधक रख दिया।

लोन एनपीए होते ही बैंक पर कर दिया केस: वर्ष 2017 में लोन  एनपीए हो गया। बैंक कि और से 3 जनवरी 2018 को जारी ‘सरफेस नोटिस’ के बाद, 4 अक्टूबर 2017 को ही बेटियो के जरिए सिविल कोर्ट में यह केस दर्ज करवा दिया गया कि यह जमीन उनकी बेटियो कि है और बैंक इसे जब्त नहीं कर सकता।

खुद के खिलाफ ही कोर्ट मे मुकदमा: बैंक ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि खुद के खिलाफ केस दायर करवाकर सिविल कोर्ट से दावा खारिज करवाने का यह पूरा नाटक सिर्फ डीआरटी इलाहाबाद में चल रही कार्रवाई से बचने के लिए रचा गया था। दोनों कि मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा चल रहा है। रिकवरी ट्रिब्यूनल ने 8 महीने में ही बैंक के हक मे फैसला सुनाया था।

ईओडब्ल्यू के मुताबिक, कंपनी के डायरेक्टर और जमानतदार  नाजनीन अली के पति जीशान अली का निधन हो चुका है। इसलिए दिसंबर मे भी इस जालसाजी के मामले मे एफआईआर दर्ज कि गई है।

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