भोपाल ( नेहा शेख )नगर निगम की विकास योजनाओ के चलते अपनी जमीन सौंपने वाले शहर के दर्जनो नागरिकों को आज तक उनका वाजिब हक नहीं मिल पाया है। लगभग 12 साल पहले बीआरटीएस कॉरिडोर और सीवेज प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए आम जनता की करीब 11.24 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसके एवज में नकद मुआवजा देने के बजाय टिडिआर के तहत दोगुना एफएसआर देने का वादा किया गया था, ताकि प्रभावित लोग इसका उपयोग किसी अन्य स्थान पर निर्माण या बाजार में बिक्री के लिए कर सकें। लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी लोगो के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी है। अब मास्टर प्लान का नया प्रारूप सामने आने के बाद इन पीड़ितो की उम्मीदे एक बार फिर जागी है। वर्तमान बाजार भाव के अनुसार इस जमीन की कीमत करीब 220 करोड़ से 320 करोड़ के बीच आंकी जा रही है।
मिसरोद क्षेत्र में 8 किलोमीटर लंबे मार्ग को 54 से 66 मीटर तक चौड़ा करने के लिए 65 भू-स्वामियों की 6.18 एकड़ भूमि ली गई थी। हालांकि प्रशासन ने साल 2024 में सड़क निर्माण पर 17 करोड़ खर्च कर दिए, लेकिन जमीन मालिको को न तो मुआवजा मिला और न ही टिडीआर। सेवानिवृत्त आईपीएस अमरीश मंगलम 320.94 वर्ग मीटर जमीन निगम को दी इस लड़ाई को अदालत तक ले गए है। सौम्या विहार निवासी मनीष तिवारी के प्लॉट पर नगर निगम ने बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के अमृत-1 योजना के तहत सिवेज पंप हाउस का निर्माण कर दिया है। मंत्रालय स्तर की जांच मे इस निर्माण को पूरी तरह अवैध पाए जाने और कार्रवाई के निर्देश मिलने के बावजूद फाइलें फाइलों में ही दबी रह गई।
नए मास्टर प्लान से क्यो बदलाव होने की उम्मीद है; नियमो के मुताबिक अमरीश मंगलम का 3.50 करोड़ मुआवज़ा बनता है, जो कोर्ट मे अटका है। टीडीआर फाइलें भी विभागों के चक्कर काट रही है। 51 किमी के दायरे में जल्द टिडीआर सर्टिफिकेट मिलने की उम्मीद है, और इसके लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया जा रहा है।
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