भोपाल:( नेहा शेख ) नगरीय निकायो में सरकारी सामानो की ख़रीदारी के दौरान सामने आई अनियमितताओ के बाद जब गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के रिकॉर्ड खंगाले गए, तो बड़ा खुलासा हुआ। सामग्री की सप्लाई करने वाली कई फ़र्मे मौके पर गायब मिलीं। जांच में सामने आया कि डिंडोरी की नगर परिषद शहपुरा ने एक ऐसी एजेंसी पर 24.72 लाख खर्च कर दिए थे। जब भोपाल में दर्ज पते पर पड़ताल की गई, हो वहां कोई सप्लाई फर्म नहीं मिली। इसी तरह, दूसरी फर्म ने वर्कशॉप में साइन बोर्ड बनाने से साफ इनकार कर दिया।
इसी क्रम में, टेंडर प्रक्रिया में महंगी ख़रीदारी और नियमों की अनदेखी की शिकायते मिलने के बाद नगर परिषद खंड में 3 करोड़ की खरीद जांच के दायरे में आई। इसमे सोलर पैनल, ई-रिक्शा, कचरा वाहन इलेक्ट्रिक, ट्रैक्टर, तिरंगा लाइट और सफाई सामाग्री शामिल थी। इस संबंध में 21 अप्रैल 2026 को शिकायत मिलने पर खाद्द विभाग की और से जांच समिति का गठन किया गया था।
कोलूखेड़ी:
भोपाल की महाकाल एजेंसी ने 2021 में रेलवे को 20 हजार सैनिटाइजर और 2025 में गुना नगर पालिका को 225 एलईडी स्ट्रीट लाइट सप्लाई की थी। जेम पोर्टल पर दर्ज पते(कोलूखेड़ी, खसरा नंबर 236/1) पर जब जांच की गई, हो वहां कोई एजेंसी नहीं बल्कि कृषि भूमि पाई गई। रिकॉर्ड के अनुसार, फर्म का जीएसटी व पंजीकरण नंबर दर्ज है, लेकिन कारोबार पूरी तरह बंद है। इसके बावजूद, दिसंबर 2025 में सेंधवा पालिका से इस बंद फर्म को 59 लाख का टेंडर दिया गया।
लालघाती:
सीहोर नगर पालिका की और से साइन बोर्ड खरीद के लिए भोपाल की ‘प्रगति इंजीनियरिंग’ से अनुबंध करने की प्रक्रिया जारी थी, जांच के दौरान लालघाती स्थित जिस जगह का पता दर्ज था, वहां सीलिंग की कार्रवाई के बाद फर्म पहले ही बंद हो चुकी थी। मौके पर मौजूदा व्यक्ति ने बोर्ड बनाने की बात कि वे साइन बोर्ड नहीं बनाते, केवल नगर निगम और नगर पालिका के अन्य काम करते है।
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