भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश राजधानी में गरीब परिवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( पीडीएस ) का चावल की अवैध बिक्री करने वाले दुकानदारों पर बड़ी कार्रवाई की गई , जिला प्रशासन ने जुर्माना 30 हजार से बढ़ाकर 16 लाख रुपए कर दिया |
इस बड़ी कार्रवाई से पहले एडीएम ने सिर्फ 30 हजार रुपए का मामूली जुर्माना लगाकर मामले को दबाने का प्रयास किया था | वहीं , जब 30 हजार जुर्माना लगाने का मामला तेजी से फैलना शुरू तो कलेक्टर कौशेलेन्द्र विक्रम सिंह ने मामले को गंभीरता से लिए हुए सख्ती की और जुर्माने की राशि बढ़ाने के साथ खाद्द आपूर्ति अधिकार का प्रभार भी बदल दिया |
दरअसल , इस मामले में एडीएम अंकुर मेश्राम ने जब्त 500 क्विंटल से अधिक चावल पर सिर्फ 30 हजार का जुर्माना लगाकर स्टॉक छोड़ दिया था | कलेक्टर कौशेलेन्द्र विक्रम सिंह ने सख्ती की , उन्होंने एडीएम मेश्राम से प्रभार लेकर ज़िम्मेदारी नए एडीएम आईएएस सुमित पांडे को दी , पांडे ने रिकॉर्ड खंगालकर जुर्माना 16 लाख तय किया , मेश्राम द्वारा लगाए पुराने जुर्मानों और आदेशों की जांच के निर्देश भी दिए गए | मामले में राजकुमार ट्रेडर्स ( राजकुमार आसवानी ) से 450 क्विंटल और महालक्ष्मी ग्रेन मार्ट ( बिनोद रिझवानी ) से 53 क्विंटल चावल जब्त हुआ था | इसकी कीमत करीब 15 लाख रुपए है , दोनों व्यापारियों को 15 दिन में राशि जमा करनी होगी , इसके बाद संपत्ति कुर्की और अंतत: एफआईआर दर्ज करने की कारवाई होगी |
सरकारी राशन की अवैध खरीद – बिक्री पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 7 के तहत 3 महीने से 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है , कई मामलों में एफआईआर और गिरफ्तारी अनिवार्य होती है | इसके बावजूद इस मामले में अब तक न तो किसी व्यापारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी को हिरासत में लिया गया है , इतने गंभीर अपराध में सिर्फ जुर्माने तक सीमित कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं |
भोपाल कलेक्टर कौशेन्द्र विक्रम सिंह ने कहा – दो व्यापारियों से पीडीएस का राशन खाद्द विभाग ने जब्त किया था | इस मामले में जुर्माना राशि विधिसंगत नहीं थी , इस कारण प्रकरण का रिव्यू करने के बाद भारी जुर्माना किया गया , जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराएंगे |
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