भोपाल ( सैफुद्दीन सैफी ) मध्यप्रदेश में बिजली चोरी और लाइन लॉस को कम करने और रोकने के लिए सरकार ने अभी तक जो प्रयास किए हैं वे सारे असफल रहे केंद्र और और राज्य सरकार ने मध्य पूर्व व पश्चिम क्षेत्र विद्दुत वितरण कंपनियों को 11 वर्ष में 2.41 लाख करोड़ रुपए बिजली चोरी और लाइन लॉस रोकने को दी तब भी जिम्मेदार अफसर इतनी बड़ी राशि से बिदली व्यवस्थाओं को हाईटेक नहीं कर पाए नतीजा एग्रीगेट टेक्नीकल और कमर्शियल लॉस बढ़ता ही जा रहा है कटौती ट्रिपिंग जैसी घटनाएं रुकी नहीं बदमाश सिस्टम तोड़कर चोरी कर रहे |
इसी कारण कंपनियां इस नुकसान की भरपाई हर वर्ष ट्रैरिफ बढ़ाकर कर रही है इसका सीधा असर प्रदेश के 1.75 करोड़ आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है इन कंपनियों ने इस बार भी नुकसान का ठीकरा उपभोक्ताओं पर फोड़ने की तैयारी है विद्दुत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की मंशानुसार नुकसान को आधार बनाते हुए ट्रैफिक की दरों में 10.2% तक बढ़ाने की पेशकश की है | मप्र में बिजली चोरी और लाइन लॉस को रोकने के लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई इसी में से एक दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना है अविद्दुतीक्रत गांवों और घरों तक कनेक्शन देना था क्रषि और गैर – क्रषि उपभोक्ताओं के लिए अलग – अलग बिजली फीडर बनाना सब – स्टेशन , ट्रांसफार्मर , फीडर और उपभोक्ताओं की मीटरिंग सहित ग्रामीण वितरण नेटवर्क को मजबूत करना था | किसानों को दिन में भी बिजली सप्लाई और अन्य उपभोक्ताओं को 24 घंटे मिल सके साथ ही बिजली की गुणवत्ता और विश्वासनीयता बढ़े | आधे – अधूरे काम टोले मजरे बिजली से आज भी छूटे हुए हैं उपभोक्ताओं को आज भी औसत खपत के बिल दिए जा रहे हैं क्योंकि इनके घरों में मीटर नहीं लगाए | क्षेत्रों में बिजली के सब – ट्रांसमिशन , वितरण नेटवर्क ट्रांसफार्मर , फीडर और मीटरिंग आईटी समक्ष बनाना जीआइएस मैपिंग , सरकारी इमारतों पर सोलर पैनल लगाकर ग्रीन और रिन्युएबल एनर्जी प्रमोट करना विद्दुत हानियों को कम करना और बिजली की गुणवत्ता सुधारना था कई सरकारी इमारतों तक सोलर पैनल भी नहीं पहुंचे शहरों में ये काम पूरे नहीं हुए बिजली के तार खुले स्मार्ट मीटर में सिस्टम उलझा है काम रिकॉर्ड पीछे है जीआइएस मैपिंग पिछड़ी है | नई लाइनें बिछा कर मजबूत बिजली सप्लाई व्यवस्था बनाना ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाना नए ग्रिड बनाना बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करना जन शिकायतों और सुविधाओं के मद्देनजर संसाधन को विकसित करना ताकि बिना रुकावट सप्लाई जारी रहे बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत बनाना इसी योजना के तहत बिजली कंपनियां हर साल 1050 करोड़ रुपए का लोन लेती हैं जिसकी गारंटी सरकार देती है हर साल राशि मिल रही लेकिन लक्ष्यों के लिए दी जा रही है वे लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई को लेकर समस्या बनी हुई है | वहीं एम पी ई बी में भ्रष्टाचार भी चरम सीमा पर और ऊपर से नीचे तक गैर ज़िम्मेवार अफसरो की फौज बैठे बैठे भारी वेतन और ठेकेदारो से कमीशन खाकर आराम फरमा रही है। इसके अलावा राजधानी मैं छोटे छोटे उपभोक्ताओ की मामूली राशि बकाया होने पर लाइन काटी जा रही है वही बिजली विभाग के मंत्री के चम्बल संभाग मे करोड़ो रूपये के बिल लोगो के बकाया है वहाँ अफसरो को उपभोक्ताओ के साथ सख्ती करने मे हाथ पाँव फूलने लगते है।
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