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सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल – टीबी अस्पताल में युवक की हुई मौत जेब में नहीं थे पैसे तो नहीं मिली एंबुलेंस ई – रिक्शा ले जाना पड़ा शव….


भोपाल ( कशिश मालवीय ) मध्यप्रदेश राजधानी के भोपाल में स्थित जवाहरलाल नेहरू टीबी अस्पताल का गुरुवार  के दिन एक शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई | अस्पताल में कर्मचारी एंबुलेंस से शव को ले जाने के लिए 600 रुपए मांग रहे थे पैसे न होने पर परिजनों को ई – रिक्शा से शव को लेकर जाना पड़ा तस्वीर ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया 1 जनवरी को लालघाटी के सिंगार चोली फ्लाईओवर के नीचे एक ऐसी घटना घटी जिसने सरकारी दावों संवेदनशीलता और व्यवस्था तीनों पर सवाल खड़े कर दिए एक गरीब परिवार को शव के साथ सड़कों पर भटकना पड़ा जहां सरकारी सिस्टम ने मुंह मोड़ा वहीं समाजसेवियों ने आगे बढ़कर मानवता का हाथ थामा और अंतिम संस्कार कराकर यह साबित किया कि इंसानियत आज भी जिंदा है |

जानकारी के अनुसार विदिशा के सिरोंज का रहने वाला जितेंद्र कुछ समय पहले रोजगार की तलाश में भोपाल आया था सिंगार चोली क्षेत्र में रहते हुए वह लंबे समय से टीबी जैसी गंभीर बीमारी का सामना कर रहा था टीबी अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार की सुबह उसकी मौत हो गई पत्नी कविता और बुजुर्ग माता – पिता रोते – बिलखते अस्पताल स्टाफ के सामने गिड़गिड़ाए कि वे बेहद गरीब हैं और शव ले जाने के लिए कोई साधन नहीं है उम्मीद थी कि सरकारी व्यवस्था साथ देगी लेकिन कर्मचारी एंबुलेंस से शव ले जाने के लिए 600 रुपए मांग रहे थे पैसे न होने पर मजबूर पत्नी ने ई रिक्शा किया और पति के शव को उसमें रखकर निकल पड़ी सिंगार चोली फ्लाईओवर के पास रिक्शा चालक उन्हें उतारकर चला गया कड़ाके की ठंड में कविता अपने पति के शव के पास बैठी रही वहीं राहगीर ठहरते देखते और आगे बढ़ जाते |

दुकानदार मुकेश ने हालात देखकर फ्लाईओवर पाठशाला की सचिव अधिवक्ता विनीता सिंह तोमर को सूचना दी विनीता मौके पर पहुंची और समाजसेवी आयन खान अनमोल जीवन संस्था और अनवर पठान को बुलाया फिर सभी शव को छोला रोड स्थित विश्राम घाट ले गए परिजनों की मौजूदगी में हिन्दू रीति – रिवाजों से विद्दुत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार कराया गया |

म्रतक की पत्नी कविता ने बताया – टीबी अस्पताल में एंबुलेंस मांगी तो कर्मचारियों की ओर से 600 रुपए की मांग की गई पैसे नहीं थे इसलिए मजबूरी में पति के शव को ई – रिक्शे में लाना पड़ा घंटों सड़क पर बेबस बैठे रहे फिर विनीता मैडम और समाजसेवियों ने आकर संभाला उनके सहयोग से ही अंतिम संस्कार हो सका |

टीबी अस्पताल अधीक्षक – डॉ. रतन वैश्य ने कहा – हमारे यहां मरीजों की सुविधा के लिए जीएमसी से एंबुलेंस मंगवाई जाती है जिन लोगों ने पैसे मांगे हैं वे निजी स्तर के हो सकते हैं अस्पताल परिसर में इस तरह की वसूली बर्दाशत नहीं की जाएगी मामले की पूरी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी |

 

 

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