भोपाल,(सैफ़ुद्दीन सैफ़ी) राजधानी के ऊंची ऊंची इमारतों से बने सरकारी अस्पतालों की हालत इन दिनों मरीजो की देखभाल और व्यवस्था के नाम पर भयंकर दयनीय हालत में पुहंच चुकी है।
पारा 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने के साथ ही भीषण गर्मी ने राजधानी में सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। दिन में लू और रात में गर्म हवाओं ने नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है।
इस भीषण गर्मी के बीच, शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक, जयप्रकाश (JP) अस्पताल में मरीज अपनी असली बीमारियों से ज्यादा प्रशासनिक लापरवाही और फेल हो चुके सिस्टम से लड़ने को मजबूर हैं।
नमी, गर्म हवाओं और टूटे हुए कूलिंग सिस्टम ने अस्पताल के अंदर की हालत बहुत खराब कर दी है। वार्ड सचमुच भट्टी में बदल गए हैं।
‘अस्पताल की व्यवस्थाओं की बड़ी कमियां सामने आईं। दोपहर की भीषण गर्मी में अस्पताल के हर वार्ड में करीब एक दर्जन से ज्यादा मरीज भर्ती मिले। हैरानी की बात है कि इन वार्डों में इतने सारे मरीजों के लिए सिर्फ एक कूलर चालू मिला।
महिला वार्ड में भी यही हाल था, जहां लगभग 15 से 20 मरीजों के लिए केवल एक कूलर चल रहा था। गर्मी का स्तर इतना ज्यादा है कि वार्डों के अंदर का माहौल गर्म हवा से भरे बंद कमरे जैसा लगता है, जिससे मरीजों को सांस लेने में भी बहुत मुश्किल हो रही है।
इस असहनीय गर्मी के कारण, मरीज और उनके साथ आए लोग प्लास्टिक के हाथ वाले पंखे और मुड़े हुए अखबारों से खुद को हवा करने पर मजबूर हैं। दोपहर में राहत न मिलने पर, बच्चों के साथ कई मरीज बच्चों के वार्ड को छोड़कर गलियारों और दूसरी ठंडी जगहों पर बैठे देखे गए।
दयनीय हालात पर दुख जताते हुए एक महिला मरीज ने कहा, “इस गर्म माहौल में मेरा पूरी तरह दम घुटता है। मुझे बार-बार अपना बिस्तर छोड़कर बाहर बैठना पड़ता है ताकि कुछ राहत मिल सके, लेकिन कहीं भी राहत नहीं है।”
स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बुजुर्ग पुरुष मरीज को वार्ड के अंदर की चुभती गर्मी बर्दाश्त न होने के कारण उसे अपने कपड़े उतारने पड़े। मगर इन सब हालातों के चलते सरकारी सिस्टम आंख मूंद कर बैठ हुआ है करोड़ो की लागत से बने ये नई बिल्डिंग के अस्पताल सुविधाओ और देखरेख के मामलों में ऊंची दुकान फीके पकवान वाली कहावत को ही बयान करते है।
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