भोपाल ( नेहा शेख ) के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएससी) में नियमों की अनदेखी कर एमबीबीएस जूनियर रेजीडेंट्स (जेआर) के पद डेंटिस्ट्री विभाग को सौंपने का बड़ा मामला सामने आया है। इस पूरी प्रक्रिया मे लगभग 21 लाख रुपये तक के स्टाइपेंड के भुगतान को लेकर उच्च स्तर पर जांच की मांग की गई है।
आरोप है कि कॉलेज के अधिष्ठाता ने संचालक चिकित्सा शिक्षा के 13 अक्टूबर 2017 के स्पष्ट निर्देशों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। इसके तहत न सिर्फ केवल जूनियर रेजीडेंट (जेआर) के पदों का विभाजन किया गया, बल्कि इन पदों की मूल शैक्षणिक अर्हता में भी मनमाने ढंग से बदलाव कर दिया गया। सिर्फ नॉटशीट चलाकर दो पद डेंटिस्ट्री विभाग में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। इस अदला-बदली के कारण एमबीबीएस योग्यताधारी योग्य उम्मीदवारों को इन पदों के लिए आवेदन करने का अवसर ही नहीं मिल पाया।
एमबीबीएस योग्यताधारियों की जगह बीडीएस योग्यताधारियों को शामिल किए जाने और इंटर्नशिप पूर्ण करने की पात्रता दर्शाकर नियुक्ति देने से मिलने वाला स्टाइपेंड एक साल में करीब 21 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इसे सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता के दायरे में देखा जा रहा है।
इस मामले को लेकर स्वस्थ्य विभाग को ईमेल के माध्यम से औपचारिक शिकायत भेजी गई हैं। शिकायत में प्रशासनिक और विभागीय नियमों के विरूद्ध किए गए इस बदलाव के आदेश को तुरंत निरस्त करने और संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
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