भोपाल:( नेहा शेख ) भोपाल में सिवेज सिस्टम के संचालन को लेकर नगर निगम और पीयूसीएल कंपनी के बीच विवाद गहराता जा रहा है। निगम ने एजेंसी को नोटिस जारी किया है, जिसके जवाब में एजेंसी का कहना है कि वे काम में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं, बल्कि निगम ही उनकी निगरानी सही से नहीं कर रहा है। अमृत-1 प्रोजेक्ट के तहत शहर में 145 करोड़ रुपए खर्च कर सीवेज नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसमें 6 पंप हाउस, 3 ट्रीटमेंट प्लांट और 52 किमी लंबी पाइपलाइन शामिल है। लेकिन देखरेख के अभाव में इसे पूरे सिस्टम की स्थिति बदहाल हो चुकी है।
पुरानी मशीनों और पंप हाउस के संचालन की ज़िम्मेदारी पीयूसीएल के पास हैं, कंपनी का दावा है कि उसकी पंपिंग क्षमता 35% जबकि वर्तमान में लोड 20%(लगभग 2 करोड़ लीटर रोजाना) है. इसके उलट, पुरानी लाइनों में लीकेज और फाल्ट के कारण अधिकांश गंदा पानी सीधे ताल तलैयों मे बह रहा हैं। अमृत-1 के तहत बनाए गए पंप हाउसों पर करीब 12 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जिन्हे 2018 में नगर निगम को हैंडओवर किया जाना था, लेकिन पुराने पंप हाउसों के ट्रांसफर को लेकर पेंच फंस गया, क्योंकि निगम ने इन्हें लेने से साफ इंकार कर दिया।
1995 से पहले पानी और सिवेज कि व्यवस्था अलग थी, जो बाद में नगर निगम के पास आई। 1995 से 2010 तक सिवेज का संचालन जलप्रदाय व्यवस्था के अंतर्गत होता रहा, और 2010 के बाद इसे निगम के दूसरे विभाग को सौंप दिया गया, हालांकि, आज तक इन पुराने पंप हाउसों की आधिकारिक हैंडओवर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई हैं।
पीयूसीएल के प्रतिनिधियों(जैसे रामजी यादव, प्रोजेक्ट इंचार्ज) का आरोप है कि पंप हाउसों में लगे पंपो की नियमित निगरानी न होने के कारण सिवेज का बहाव बाधित होता है और मशीनों बार-बार खराब हो जाती है. वहीं दूसरी और,कंपनी के स्थानीय कर्मचारियों काम मे लापरवाही बरत रहे हैं, जिसके चलते शासन स्तर पर अब इनके खिलाफ कार्रवाई और कर्मचारियों को हटाने पर विचार चल रहा हैं।
इस पूरे मामले को लेकर शासन को पत्र लिखा जा चुका हैं। मुख्य अभियंता सुनील चतुर्वेदी और तन्मय वशिष्ठ शर्मा का कहना है कि अनट्रीटेड सिवेज का शिकायतों के बाद एजेंसी को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया है, और इस संबंधो में शासन को भी अवगत करा दिया गया हैं।
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