भोपाल : 30/08/2024 : न घर के रहे न घाट के कुछ ऐसा ही इन युवाओं के साथ भी हुआ दरअसल नई के चक्कर में पुरानी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा कई युवाओं को अब सर्टिफिकेट लिए इधर उधर भटक रहे हैं | युवाओं को नौकरी का लालच देकर विभाग ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत नवंबर 2022 में कुशल श्रमिक माली बनाए जाने के लिए 2500 युवाओं को ट्रेनिंग दी थी, ट्रेनिंग देने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जगह बुलाया गया | 2500 लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए शिवपुरी, सागर, अनूपपुर, पचमढ़ी, भोपाल के पास कान्हासैया में बुलाया | इन लोगों को 25 दिन में 200 घंटे ट्रेनिंग देकर इसका सर्टिफिकेट दिया गया था, हालांकि इनमें से एक को भी अब तक नियुक्ति नहीं मिली है, जबकि 35 साल से प्रदेश में सरकारी विभागों में माली की भर्ती नहीं हुई है, मालियों के कई पद खाली हैं | ट्रेनिंग के दौरान उनके खाने पीने और रहने का खर्च विभाग ने उठाया था, जबकि आने-जाने का खर्च चयनित लोगों ने किया था | इन युवाओं को भी कहीं नौकरी नहीं मिली है | वो सर्टिफिकेट लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं | इनमें से कई युवाओं ने नौकरी छोड़कर ट्रेनिंग में हिस्सा लिया, राहुल गुप्ता ने बताया कि मैंने ट्रेनिंग का लेटर मिलते ही प्राइवेट सेक्टर की 18 हज़ार रु. की नौकरी छोड़ दी थी | मुझे उम्मीद थी कि ट्रेनिंग के बाद हमें उद्दानिकी विभाग की नर्सरी में बतौर माली नौकरी मिल जाएगी | लेकिन नई नौकरी मिलना तो दूर जो थी वो भी चली गई | हमने इस बारे में उद्दानिकी मंत्री से बात की, तो उनका कहना है कि हमने बात आगे बढ़ा दी है, लेकिन वित्त विभाग में फाइल अटकी हुई है | नियुक्ति के लिए हमने कई बार कहा लेकिन महज आश्वासन देकर चलता कर दिया जाता है | इस मामले में डिप्टी डायरेक्टर का कहना है कि हमने जो आदेश निकाला था उसमें यह नहीं लिखा कि ट्रेनिंग के बाद नियुक्ति देंगे, यह प्रशिक्षण सिर्फ इसलिए था कि इससे सीखकर लोग निजी नर्सरी, बड़े गार्डन और अन्य जगह काम कर रोजगार प्राप्त कर सकें | हालांकि यह बात सत्य है कि उद्दानिकी विभाग की 300 नर्सरियां हैं, और मालियों के 448 पद स्वीकृत हैं इनमें से लगभग आधे पद खाली पड़े हैं
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