भोपाल : 24/02/2025 : नकली नोट छापने के मामले में दो आरोपी भूपेंद्र यादव और सोनू विश्वकर्मा को क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन उनके खिलाफ सबूत जुटाने में बड़ी लापरवाही बरती गई | क्राइम ब्रांच ने नकली नोट छापने के लिए उपयोग किए जाने वाला प्रिंटर जिस मकान से जब्त किया वो मकान किसका था यह प्रकरण में नहीं बताया | इसके अलावा प्रिंटर किसके नाम था, इसका भी कोई उल्लेख नहीं किया | साथ ही क्राइम ब्रांच की लापरवाही के चलते जब्त प्रिंटर की कोई मैकेनिकल जांच नहीं कराई गई जिससे पता चल सके कि प्रिंटर चालू था या नहीं | एसआई शिवराज सिंह ने न्यायालय में दिए गए बयान में बताया कि वो निजी वाहन से आरोपियों को पकड़ने गए थे, वहीं पुलिस साक्षी सुनील शर्मा ने न्यायिक कथन में बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए सरकारी वाहन का उपयोग किया गया | नोटों को 3 बार महाप्रबंधक बैंक प्रेस देवास जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन मालखाने में इस दौरान नोटों को कितनी बार निकाला और जमा किया गया इसका कहीं भी कोई उल्लेख नहीं किया गया | साथ ही नोटों को कहां और किस नंबर पर जमा किया गया उसका भी पता नहीं | नोटों में यदि कोई कमी या गलती होती है तो उस गलती को रोजनामचा सान्हा में दर्ज कराया जाता है | लेकिन नोटों में 2 बार ड्राफ्ट पर लिखे सीरियल नंबर गलत पाए गए इसके बाद भी रोजनामचा में एक भी जगह किसी गलती का कोई उल्लेख नहीं है | साक्षी सुनील शर्मा ने बताया कि पुलिस को मुखबिर से कोई सूचना नहीं मिली थी, और न ही इस संबंध में कोई शिकायत आई, आरोपियों को नोटों का आदान प्रदान करते भी नहीं देखा गया पुलिस कार्यवाही किस आधार पर की गई बताया नहीं | क्राइम ब्रांच ने आरोपी का घर नरसिंहगढ़ बताया है, लेकिन इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की गई, साथ ही नरसिंहगढ़ के किसी व्यक्ति का बयान नहीं लिया गया जिससे यह साबित हो सके कि मकान आरोपी का है | क्राइम ब्रांच की इन लापरवाहियों के कारण कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया है | कोर्ट ने कहा कि मामले में पुलिस की तरफ से साफ लापरवाही सामने आई है | जिससे आरोपियों को फंसाने की संभावना नजर आ रही है क्राइम ब्रांच की जो लापरवाही सामने आई है उसके चलते आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता |
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