भोपाल ( कशिश मालवीय ) राजधानी नगर निगम में शिकायतों को लेकर हो रही लापरवाही नवंबर शुरूआत के 4 दिन में कॉल सेंटर में 334 शिकायतें आईं , इनमें से सिर्फ 68 ही हल हो पाईं | यह स्थिति मंगलवार को शिकायतों की समीक्षा के दौरान महापौर के सामने आई | पिछले महीने अक्टूबर की बात करें तो एक महिने में कॉल सेंटर पर 3759 शिकायतें आईं थी जिसमें से 2728 हल हो पाईं यानी 1031 शिकायतें पेंडिंग रह गईं | पुरानी शिकायतें आदि सबको जोड़ दिया जाए तो मौजूद स्थिति में कॉल सेंटर पर कुल मिलाकर 3147 शिकायतें पेंडिंग हैं |
24 घंटे काम करने वाले इस कॉल सेंटर पर शिकायत तो दर्ज हो जाती है , उसका नंबर भी मिल जाता है , लेकिन शिकायत हल कब होगी ? इसकी कोई गारंटी नजर नहीं आती | मंगलवार को महापौर मालती राय जब कॉल सेंटर पर दर्ज शिकायतों की समीक्षा कर रहीं थीं तो यह सच्चाई उनके सामने आईं | महापौर ने उन शिकायतों को भी चैक किया जिनके बारे में बताया गया कि इन्हें नागरिक की संतुष्टि पर बंद कर दिया गया है | महापौर ने जब जेके रोड पर ठेलों का अतिक्रमण की शिकायत करने वाली महिला को फोन लगाया और पूछा कि क्या आपकी शिकायत हल हो गईं है | इस पर महिला ने बताया कि शिकायत के बाद ठेले हटाए गए थे , लेकिन वह ठेले वापस वहीं जम गए |
स्ट्रीट डॉग की 1683 शिकायतें पेंडिंग है , इसका कारण बताया जाता है कि नियमों के अनुसार वैक्सीनेशन और नसबंदी के बाद निगम कर्मचारी डॉग को उसी इलाके में छोड़ते है, जबकि नागरिक चाहते हैं कि डॉग उनके इलाके में न आएं | वहीं स्ट्रीट लाइट कि 841 शिकायतें पेंडिंग हैं , रिकॉर्ड पर इसमें से 439 नगर निगम और 402 स्मार्ट सिटी के खाते में हैं | लेकिन आम नागरिकों ने कॉल सेंटर पर फीडबैक दिया है कि नगर निगम और स्मार्ट सिटी के कर्मचारी एक दूसरे पर टालते रहते हैं | इसके अलावा सीवेज समस्या की 173 शिकायतें पेंडिंग हैं इनमें सीवेज ब्लॉक होने की 90 शिकायतें पुरानी हैं | और 38 नई शिकायतें दर्ज हो गईं , जबकि सीवेज रिपेयरिंग की 45 और शिकायतें पेंडिंग हैं |
महापौर मालती राय ने शिकायतों के पेंडिंग रहने पर विरोध जताते हुए बोला कि दो दिन में स्थिति ठीक करें | अगले मंगलवार को होने वाली समीक्षा में पेंडिंग शिकायतें सामने नहीं आना चाहिए | सवाल किया कि , आखिर एक महीने में ऐसा क्या हो गया कि पेंडिंग शिकायतों कि संख्या बढ़ गई |
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